वैश्विक मंच पर गूंजी उत्तर प्रदेश की पारंपरिक कला और शिल्पकला | विदेशी कर रहे हैं यूपी के हुनर की सराहना

उत्तर प्रदेश की पारंपरिक कला और शिल्पकला आज सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उसकी गूंज अब वैश्विक मंच तक पहुंच चुकी है। देश की यह सबसे अधिक जनसंख्या वाली राज्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्प परंपरा के लिए जानी जाती है। कारीगरों के निपुण हाथों से निकली बनारसी साड़ियां, मुरादाबाद की पीतल कला, फिरोजाबाद का ग्लासवर्क, सहारनपुर की लकड़ी नक्काशी और खुर्जा की पॉटरी अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी छाप छोड़ रही हैं।
भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” (ODOP) योजना के अंतर्गत कारीगरों को न केवल प्रशिक्षण दिया जा रहा है बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। इस प्रयास से न केवल पारंपरिक कला को नया जीवन मिला है बल्कि हजारों परिवारों को रोजगार का अवसर भी प्राप्त हुआ है।
हाल ही में दुबई, लंदन और टोक्यो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की खूब सराहना हुई। विदेशी खरीदारों ने न केवल बनारसी साड़ियों और चिकनकारी कपड़ों को पसंद किया बल्कि हाथ से बने पीतल के शोपीस, टेराकोटा आर्ट और खादी वस्त्रों में भी गहरी रुचि दिखाई। इन आयोजनों में उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने अपनी परंपरा और आधुनिकता का ऐसा संगम प्रस्तुत किया जिसने सबका दिल जीत लिया।
सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार इस दिशा में प्रयासरत है कि राज्य का प्रत्येक कारीगर डिजिटल माध्यम से विश्व के किसी भी कोने में अपने उत्पाद बेच सके। इसके लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और एक्सपोर्ट नीतियों को सरल बनाया गया है।
आज उत्तर प्रदेश की कला न केवल राज्य की पहचान बन चुकी है, बल्कि “मेड इन यूपी” ब्रांड के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना रही है। विदेशी पर्यटक और खरीदार अब इसे भारतीय परंपरा की आत्मा मानकर संजो रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश का शिल्प अब सिर्फ धरोहर नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।



