
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया एक या दो शक्तियों के सहारे नहीं चल सकती, बल्कि इसके लिए बहुध्रुवीय व्यवस्था की जरूरत है, जहां सभी देशों को समान अवसर, सम्मान और भागीदारी मिले। गुटेरस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर व्यापार, सुरक्षा और तकनीक को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है और बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक चुनौतियों—जैसे जलवायु परिवर्तन, गरीबी, युद्ध और आर्थिक असमानता—का समाधान सहयोग और साझेदारी से ही संभव है, न कि प्रभुत्व की राजनीति से।
अपने संबोधन में UN प्रमुख ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए समझौते का हवाला देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मजबूत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत और EU जैसे बड़े लोकतांत्रिक और आर्थिक साझेदारों का साथ आना यह दिखाता है कि अलग-अलग क्षेत्र, संस्कृति और हितों वाले देश भी साझा लक्ष्यों के लिए एकजुट हो सकते हैं। गुटेरस के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार या निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक, जलवायु कार्रवाई, सप्लाई चेन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भी वैश्विक स्थिरता को मजबूत करेगा।
गुटेरस ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में कई विकासशील देशों की आवाज पर्याप्त रूप से नहीं सुनी जाती। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुसार वैश्विक शासन प्रणाली को ढालना अनिवार्य है। भारत जैसे उभरते देशों की भूमिका को उन्होंने खास तौर पर रेखांकित किया और कहा कि वैश्विक निर्णय-निर्माण में इनकी भागीदारी दुनिया को अधिक संतुलित और न्यायपूर्ण बनाएगी।
अपने बयान के अंत में UN महासचिव ने चेतावनी दी कि अगर दुनिया कुछ ताकतों के दबाव में चलती रही तो अस्थिरता और टकराव बढ़ेंगे। इसके विपरीत, अगर देश सहयोग, संवाद और साझेदारी का रास्ता अपनाते हैं तो शांति और समृद्धि संभव है। भारत-EU समझौता इसी सोच का प्रतीक है, जो यह संदेश देता है कि भविष्य टकराव का नहीं, बल्कि सहयोग का है।



