
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के मेमोरियल पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी अहम तस्वीर सामने आई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नागपुर स्थित स्मृति स्थल पर पहुंचकर RSS संस्थापक को श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने डॉ. हेडगेवार के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए एक अनुशासित, विचारशील और सेवा-भाव से जुड़ा संगठन खड़ा किया, जो आज देशभर में सामाजिक कार्यों के जरिए अपनी भूमिका निभा रहा है। फडणवीस ने कहा कि RSS ने समाज को जोड़ने और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का काम किया है।
वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी स्मृति स्थल पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार का जीवन त्याग, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। शिंदे ने यह भी कहा कि संघ की विचारधारा ने समाज के हर वर्ग को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया है।
दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री अजित पवार का इस कार्यक्रम में न जाना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि उनकी अनुपस्थिति को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उनके राजनीतिक रुख और सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधने की रणनीति से जुड़ा हो सकता है, जबकि कुछ इसे व्यस्त कार्यक्रम या पूर्व निर्धारित जिम्मेदारियों से जोड़कर देख रहे हैं।
इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की सियासत में नए कयास लगाए जा रहे हैं। खासतौर पर इसलिए भी क्योंकि राज्य में गठबंधन सरकार है और हर सार्वजनिक मंच पर नेताओं की मौजूदगी या गैरमौजूदगी को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जाता है। फिलहाल फडणवीस और शिंदे की श्रद्धांजलि से यह स्पष्ट संदेश गया कि वे RSS के संस्थापक और उनकी विचारधारा के प्रति सम्मान रखते हैं, जबकि अजित पवार की अनुपस्थिति पर सस्पेंस बना हुआ है।



