अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA एक बड़े संकट की ओर बढ़ रही है। खबरों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन द्वारा बजट में की गई भारी कटौती के चलते करीब 2000 कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक रही है। इस फैसले से एजेंसी के अंदर काफी हलचल मच गई है और कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
बजट कटौती के बाद NASA ने अपने वरिष्ठ और स्थायी कर्मचारियों को वॉलंटरी रिटायरमेंट प्लान ऑफर किया है, ताकि बिना जबरन छंटनी के कर्मचारी खुद से एजेंसी छोड़ सकें। यह कदम संस्थान के खर्चों को घटाने और फंड की सीमाओं में काम करने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
ट्रंप सरकार के इस फैसले की कई हलकों में आलोचना हो रही है क्योंकि इससे अमेरिका की स्पेस रिसर्च और भविष्य की परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। NASA पहले ही कई महत्त्वपूर्ण मिशनों की तैयारी में जुटा हुआ है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की संभावित कमी इसका संचालन और अनुसंधान प्रभावित कर सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो न केवल अमेरिका की स्पेस तकनीक की गति धीमी होगी, बल्कि वैश्विक स्पर्धा में उसकी स्थिति भी कमजोर पड़ सकती है।
NASA की परियोजनाएं भी होंगी प्रभावित
इस बजट कटौती का सीधा असर NASA की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर पड़ सकता है। मौजूदा समय में एजेंसी आर्टेमिस मिशन, चंद्रमा और मंगल की लंबी अवधि की उड़ानों के लिए मानवयुक्त मिशन, और पृथ्वी की जलवायु पर शोध जैसे कार्यों में जुटी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों की कमी से इन मिशनों की गति धीमी पड़ सकती है, और अनुसंधान की गुणवत्ता पर भी असर हो सकता है।
वैज्ञानिक समुदाय में चिंता
अमेरिकी वैज्ञानिक समुदाय इस कटौती को लेकर गंभीर चिंता जता रहा है। उनका कहना है कि स्पेस रिसर्च में निवेश घटाना न सिर्फ वैज्ञानिक प्रगति को रोक सकता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका की अग्रणी भूमिका को भी कमजोर कर सकता है। चीन और यूरोप जैसे देश अंतरिक्ष में लगातार प्रगति कर रहे हैं, ऐसे में NASA का कमजोर होना अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में नुकसानदायक साबित हो सकता है।
रिटायरमेंट प्लान से नहीं सुलझेगी समस्या
हालांकि NASA ने वॉलंटरी रिटायरमेंट प्लान पेश कर कर्मचारियों को विकल्प देने की कोशिश की है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समाधान अल्पकालिक है। अगर भविष्य में और भी बजट में कटौती होती रही तो मजबूरन एजेंसी को अनिवार्य छंटनी करनी पड़ सकती है। इससे कार्य संस्कृति और मनोबल दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
राजनीतिक विवाद भी शुरू
ट्रंप के इस फैसले को लेकर अमेरिका के राजनीतिक हलकों में भी विवाद खड़ा हो गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने इस कदम को भविष्य विरोधी बताया है और कहा है कि विज्ञान व तकनीक की नींव को कमजोर करना अमेरिका के लिए दीर्घकालिक नुकसान का कारण बन सकता है। उनका तर्क है कि भविष्य के रोजगार, नवाचार और वैश्विक दबदबे के लिए NASA जैसे संस्थानों को और अधिक समर्थन मिलना चाहिए।



