
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया कि चीन और रूस अमेरिका से डरते हैं और उनके राष्ट्रपति रहते हुए दुनिया में बड़े स्तर पर किसी भी देश ने युद्ध छेड़ने की हिम्मत नहीं की। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने करीब आठ बड़े संघर्षों और युद्ध जैसे हालातों को खत्म कराने में अहम भूमिका निभाई। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है, क्योंकि ट्रंप का यह दावा सीधे तौर पर चीन और रूस जैसी महाशक्तियों को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।
ट्रंप का कहना है कि उनकी ‘सख्त विदेश नीति’ और ‘अमेरिका फर्स्ट’ दृष्टिकोण के चलते दुनिया के ताकतवर देश संयम बरतने को मजबूर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व के कमजोर रवैये के कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ी है और युद्ध जैसे हालात फिर से उभर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि उनके समय में उत्तर कोरिया, मध्य पूर्व और अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रों में तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाए गए थे।
हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप ने कुछ क्षेत्रों में आक्रामक नीति अपनाकर अल्पकालिक संतुलन जरूर बनाया, लेकिन दीर्घकालिक समाधान नहीं निकल पाए। वहीं, आलोचकों का कहना है कि चीन और रूस के साथ उनके संबंधों में कई बार तनाव बढ़ा और कूटनीतिक रिश्तों में अस्थिरता भी देखी गई।



