
जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम आने की चर्चाओं के बीच अमेरिकी न्यायिक विभाग (DOJ) ने स्पष्ट बयान जारी करते हुए कहा है कि ट्रंप के खिलाफ लगाए जा रहे सभी दावे झूठे, भ्रामक और पूरी तरह बेबुनियाद हैं। विभाग ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में जिस तरह से नाम जोड़कर अटकलें फैलाई जा रही हैं, उनका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है और न ही आधिकारिक जांच में ऐसे प्रमाण सामने आए हैं, जो इन दावों की पुष्टि करते हों।
न्यायिक विभाग के अनुसार, एपस्टीन केस से संबंधित कई दस्तावेज़ और फाइलें लंबे समय से सार्वजनिक डोमेन में हैं, लेकिन उनमें दर्ज नामों का मतलब यह नहीं होता कि संबंधित व्यक्ति किसी अपराध में शामिल है। विभाग ने जोर देकर कहा कि किसी भी व्यक्ति को केवल नाम के उल्लेख के आधार पर दोषी ठहराना कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। DOJ ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप के खिलाफ न तो कोई आरोप पत्र दाखिल किया गया है और न ही किसी सक्रिय जांच में उन्हें आरोपी के रूप में नामित किया गया है।
इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में चल रही बहस और तेज हो गई है। ट्रंप समर्थकों का कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक बदनाम करने की कोशिश का हिस्सा है, खासकर ऐसे समय में जब चुनावी माहौल गरमाया हुआ है। वहीं, विपक्षी खेमे का तर्क है कि एपस्टीन केस से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की शंका की गुंजाइश न रहे।
न्यायिक विभाग ने मीडिया और आम जनता से अपील की है कि वे अपुष्ट सूचनाओं और अटकलों पर भरोसा न करें। विभाग ने कहा कि कानून साक्ष्यों पर चलता है, न कि अफवाहों पर। यदि किसी के खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं, तो कार्रवाई तय प्रक्रिया के तहत की जाती है, चाहे वह कोई भी हो। फिलहाल, ट्रंप के नाम को एपस्टीन फाइल्स से जोड़ने वाले दावों को DOJ ने सिरे से खारिज कर दिया है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी न्यायिक विभाग का यह बयान साफ संकेत देता है कि एपस्टीन केस को लेकर फैलाई जा रही कई कहानियां तथ्यात्मक जांच में टिक नहीं पातीं। ऐसे में, विशेषज्ञों का मानना है कि इस संवेदनशील मामले में जिम्मेदार रिपोर्टिंग और कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान बेहद जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो।



