
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते परिदृश्य को लेकर भारत की रणनीति को लेकर बड़ा दावा किया गया है। सर्वे में कहा गया है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित टैरिफ नीति, चीन की आक्रामक व्यापारिक चालें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव आने वाले वर्षों में दुनिया की आर्थिक दिशा तय करेंगे। ऐसे में भारत ने इन तीनों बड़ी चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए दीर्घकालिक और संतुलित योजना तैयार की है। सर्वे के अनुसार, यदि अमेरिका दोबारा सख्त टैरिफ नीति अपनाता है तो इससे वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव आएगा, जिसका लाभ भारत को मिल सकता है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)’ जैसी योजनाओं के जरिए भारत खुद को वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
चीन की चालों को लेकर आर्थिक सर्वे में स्पष्ट कहा गया है कि भारत अब केवल सस्ता श्रम आधारित अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू मांग के दम पर मजबूत खिलाड़ी बनकर उभर रहा है। चीन की धीमी होती अर्थव्यवस्था और वहां बढ़ती लागत के बीच भारत विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है। सर्वे में यह भी माना गया है कि भारत को निर्यात विविधीकरण, नए बाजारों की तलाश और क्षेत्रीय व्यापार समझौतों को मजबूती देने पर विशेष ध्यान देना होगा।
AI को लेकर आर्थिक सर्वे ने जहां एक ओर रोजगार पर इसके संभावित खतरे की बात कही है, वहीं दूसरी ओर इसे उत्पादकता बढ़ाने का बड़ा माध्यम भी बताया है। सर्वे के मुताबिक भारत की युवा आबादी, मजबूत आईटी सेक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर AI क्रांति में देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। सरकार स्किल डेवलपमेंट, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग पर जोर देकर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि AI के कारण रोजगार खत्म होने के बजाय नए अवसर पैदा हों। कुल मिलाकर आर्थिक सर्वे यह संकेत देता है कि ट्रंप का टैरिफ हो, चीन की रणनीति हो या AI की चुनौती—भारत ने हर मोर्चे पर संतुलित और दूरदर्शी प्लानिंग के साथ खुद को वैश्विक आर्थिक दौड़ में मजबूत स्थिति में खड़ा करने की तैयारी कर ली है।



