
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत की तेज़ी से बढ़ती आर्थिक ताकत और डिजिटल क्षमताओं की प्रशंसा करते हुए कहा है कि वैश्विक AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत एकदम सही स्थान है। उन्होंने माना कि तकनीक, नवाचार और जनसंख्या के पैमाने पर भारत ने जिस तरह की प्रगति की है, वह दुनिया के लिए उदाहरण बन चुकी है। गुटेरेस ने यह भी रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्र में भारत की भूमिका आने वाले वर्षों में और निर्णायक होगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा, स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत इच्छाशक्ति—इन सभी का अनूठा मेल है, जो किसी भी वैश्विक आयोजन को सफल बना सकता है।
महासचिव ने भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा कि तेज़ विकास दर, बड़े बाजार और युवाओं की भागीदारी देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि AI का उपयोग मानवता के हित में, समानता और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, भारत इस दिशा में संतुलित और जिम्मेदार नेतृत्व दे सकता है। गुटेरेस ने डिजिटल समावेशन, डेटा सुरक्षा और नैतिक AI के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि इन विषयों पर वैश्विक सहमति बनाने में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में AI को लेकर अवसरों और चुनौतियों दोनों पर चर्चा तेज़ है। भारत पहले ही डिजिटल भुगतान, पहचान प्रणाली और सार्वजनिक सेवाओं में तकनीक के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का मॉडल पेश कर चुका है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। गुटेरेस की टिप्पणी को भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर AI शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित होता है, तो इससे न केवल तकनीकी सहयोग बढ़ेगा बल्कि विकासशील देशों की आवाज़ को भी मजबूती मिलेगी।



