
संयुक्त राष्ट्र के नए वैश्विक मानचित्र को लेकर भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। भारत ने समान क्षेत्रफल वाले मानचित्रों के उपयोग को प्रोत्साहित करने वाले प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, लेकिन साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के चित्रण को लेकर अपनी स्पष्ट आपत्ति दर्ज कराई है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव किसी एक विशेष विश्व मानचित्र या मानचित्र प्रणाली को अपनाने अथवा प्रमाणित करने से संबंधित नहीं है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नामों से जुड़ी राजनीतिक मानचित्रकला पर भी कोई फैसला नहीं किया गया है।
भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों समेत भारत के संप्रभु क्षेत्र को देश के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दर्शाया जाना चाहिए। भारत ने किसी भी गलत, भ्रामक या वास्तविक स्थिति से अलग चित्रण को अस्वीकार्य बताया है।
भारत की यह प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 4 सितंबर को ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद आई है। प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे मानचित्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, जिनमें दुनिया के विभिन्न भू-भागों का क्षेत्रफल तुलनात्मक रूप से अधिक सटीक दिखाई दे।
नए प्रस्ताव के तहत समान क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रक्षेपणों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। मौजूदा मर्केटर प्रोजेक्शन में ध्रुवों के करीब स्थित भू-भाग वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के आसपास के क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटे नजर आते हैं।
भारत का कहना है कि समान क्षेत्रफल वाले मानचित्रों को बढ़ावा देने का समर्थन उसकी ओर से किसी विशेष राजनीतिक मानचित्र को मान्यता देना नहीं माना जाना चाहिए। भारत ने अपने आधिकारिक मानचित्र और क्षेत्रीय अखंडता पर अपनी स्थिति को स्पष्ट और अपरिवर्तनीय बताया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया और कुछ देशों ने मतदान से दूरी बनाई। प्रस्ताव का मुख्य फोकस दुनिया के भू-भागों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अधिक करीब दिखाना है।
भारत के लिए इस पूरे मामले में मानचित्र की तकनीकी प्रणाली से अधिक महत्वपूर्ण अपने संप्रभु क्षेत्र का सही चित्रण है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के क्षेत्र को उसके आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए।
‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन का उद्देश्य पारंपरिक मर्केटर मानचित्र में मौजूद क्षेत्रफल संबंधी विकृतियों को कम करना है। इसके जरिए अफ्रीका समेत भूमध्य रेखा के आसपास स्थित भू-भागों को उनके वास्तविक आकार के अधिक करीब प्रदर्शित करने की कोशिश की गई है।
भारत ने नए मानचित्र संबंधी वैश्विक पहल के व्यापक उद्देश्य का समर्थन करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। नई दिल्ली का संदेश है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में भारत की क्षेत्रीय अखंडता और आधिकारिक सीमाओं का सही चित्रण होना चाहिए।



