जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले की अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एक सुर में निंदा की है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य सहयोगी देशों ने इस हमले को कायरतापूर्ण और मानवता के खिलाफ बताया। हालांकि, हैरानी की बात यह रही कि किसी भी देश ने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि भारत के पास इस हमले में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों की भूमिका के स्पष्ट संकेत हैं। इस बीच, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और आतंकवाद की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए QUAD (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) ने तीन नए अभियान शुरू करने की घोषणा की है—जिसमें समुद्री निगरानी, साइबर सुरक्षा सहयोग और आतंकवाद विरोधी रणनीति शामिल हैं। भारत के लिए यह दोहरी रणनीति का समय है—एक ओर आतंकी हमलों से जूझना और दूसरी ओर क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर सुरक्षा ढांचा मजबूत करना।
जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए इस हालिया आतंकी हमले ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हमले में कई निर्दोष नागरिक घायल हुए, जिनमें पर्यटक भी शामिल थे। भारतीय एजेंसियों का दावा है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान स्थित आतंकी गुटों द्वारा रची गई थी, जिनके पास पहले से सक्रिय मॉड्यूल थे।
अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और जापान सहित कई देशों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ एकजुटता जताई है। हालांकि, इस एकजुटता के बीच एक बात साफ थी—किसी भी देश ने पाकिस्तान का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया। यह कूटनीतिक ‘न्युट्रलिटी’ भारत के लिए काफ़ी निराशाजनक रही, क्योंकि भारत वर्षों से पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क की ओर ध्यान दिलाता आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का नाम लेने से बचना रणनीतिक कूटनीति का हिस्सा है। कई पश्चिमी देश, खासकर अमेरिका, अफगानिस्तान और पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। इसके अलावा, चीन-पाकिस्तान संबंध भी वैश्विक संतुलन को प्रभावित करते हैं, जिससे कुछ देश पाकिस्तान को खुलेआम कठघरे में खड़ा करने से बचते हैं।



