डायबिटीज और कैंसर पर WHO की चेतावनी, मीठे पेय पर टैक्स बढ़ाने की अपील

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज, मोटापा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को लेकर एक बार फिर सरकारों को चेताया है। WHO का कहना है कि मीठे पेय पदार्थों यानी शुगर ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन इन बीमारियों का बड़ा कारण बनता जा रहा है। इसी को देखते हुए संगठन ने सभी देशों की सरकारों से अपील की है कि वे शर्करा युक्त पेय पदार्थों पर टैक्स बढ़ाएं, ताकि इनके सेवन को कम किया जा सके और लोगों को स्वस्थ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
WHO के अनुसार, सॉफ्ट ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और फ्लेवर्ड शुगर ड्रिंक्स में अत्यधिक मात्रा में चीनी होती है, जो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती है। यही इंसुलिन रेजिस्टेंस आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनती है। इतना ही नहीं, कई शोधों में यह भी सामने आया है कि ज्यादा शुगर का सेवन मोटापे को बढ़ावा देता है, जो कैंसर के कई प्रकारों, जैसे स्तन कैंसर, कोलन कैंसर और लिवर कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है।
WHO का मानना है कि मीठे पेय पदार्थों पर टैक्स बढ़ाने से दोहरा लाभ होगा। पहला, इन उत्पादों की कीमत बढ़ने से लोग इनका कम सेवन करेंगे। दूसरा, टैक्स से प्राप्त होने वाला राजस्व सरकारें स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण कार्यक्रमों और जन-जागरूकता अभियानों में लगा सकती हैं। कई देशों में पहले से लागू शुगर टैक्स के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं, जहां सॉफ्ट ड्रिंक्स की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों का रुझान पानी, ताजे फलों के रस और कम चीनी वाले पेय की ओर बढ़ा है।
WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल टैक्स ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ खाद्य लेबलिंग को स्पष्ट करना, बच्चों को लक्षित विज्ञापनों पर रोक लगाना और स्कूलों में स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देना भी जरूरी है। संगठन का कहना है कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में डायबिटीज और कैंसर का बोझ स्वास्थ्य प्रणालियों पर और अधिक बढ़ जाएगा। इसलिए WHO का यह आह्वान वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।



