
वर्ल्ड अपडेट्स के तहत सामने आई एक रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मूल के एक अमेरिकी साइबर एजेंसी के डायरेक्टर पर आरोप है कि उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल ChatGPT पर कुछ संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेज अपलोड किए। इस मामले के सामने आते ही अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है और पूरे प्रकरण की औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ये दस्तावेज राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा, आंतरिक प्रक्रियाओं और संभावित खतरों से जुड़े हो सकते हैं, जिन्हें सार्वजनिक या थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म पर साझा करना नियमों के खिलाफ माना जाता है।
सूत्रों का कहना है कि संबंधित अधिकारी ने यह कदम कथित तौर पर विश्लेषण या ड्राफ्टिंग में सहायता के लिए उठाया था, लेकिन साइबर सुरक्षा नियमों के तहत किसी भी संवेदनशील डेटा को सार्वजनिक एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इसी कारण अमेरिकी प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि अपलोड किए गए दस्तावेज कितने संवेदनशील थे, क्या उनमें गोपनीय जानकारी थी और क्या इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई वास्तविक खतरा पैदा हुआ है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं यह मानवीय भूल थी या फिर प्रोटोकॉल की जानबूझकर अनदेखी की गई।
इस घटना ने एक बार फिर एआई टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल और उनसे जुड़े जोखिमों को उजागर कर दिया है। हाल के वर्षों में ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी गहरी हुई हैं। कई देशों की सरकारें पहले ही अपने अधिकारियों को चेतावनी दे चुकी हैं कि वे संवेदनशील दस्तावेजों को किसी भी ओपन एआई सिस्टम में साझा न करें। इसके बावजूद इस तरह की रिपोर्ट सामने आना सिस्टम में मौजूद खामियों की ओर इशारा करता है।
फिलहाल संबंधित अधिकारी की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं आया है, हालांकि सूत्रों के मुताबिक उन्होंने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस मामले में नियमों का कितना उल्लंघन हुआ और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकरण के बाद अमेरिका समेत कई देश अपने साइबर सुरक्षा और एआई उपयोग से जुड़े दिशा-निर्देशों को और सख्त कर सकते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।



