यूपी में वंचित समाज का सशक्तिकरण | योगी सरकार की जनजातीय विकास पहल

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते वर्षों में वंचित और जनजातीय समाज के उत्थान को नया आयाम मिला है। जहां पहले जनजातीय समुदाय मुख्यधारा से काफी हद तक दूर था, वहीं अब सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं और अभियानों ने उनकी पहचान को मजबूती से सामने लाने का काम किया है। योगी सरकार ने जनजातीय समाज की परंपराओं, संस्कृति और इतिहास को सम्मान देने के साथ-साथ उनके आर्थिक एवं सामाजिक विकास पर विशेष ध्यान दिया है।
राज्य सरकार ने सबसे पहले उन क्षेत्रों की पहचान की, जहां जनजातीय समाज की आबादी अधिक है, लेकिन सुविधाएं कम थीं। इसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए गए। कई जनजातीय बहुल गांवों को ‘अस्पिरेशनल गांव’ की श्रेणी में शामिल कर विशेष योजनाओं का लाभ सीधा पहुंचाया गया। स्कूलों में बच्चों के नामांकन बढ़ाने के लिए छात्रवृत्ति, डे-केयर मॉडल, हॉस्टल सुविधाएं और स्मार्ट क्लासरूम जैसी पहल की गईं।
इसी तरह, स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट, स्वास्थ्य शिविर और एएनएम सेंटर की संख्या बढ़ाई गई। जनजातीय महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया, जिससे उनकी आजीविका के साधन बढ़े और आर्थिक स्वावलंबन को मजबूती मिली।
योगी सरकार ने ‘जनजातीय गौरव दिवस’, ‘वन धन योजना’, ‘ट्राइबल म्यूजियम’ और पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाकर आदिवासी समाज की संस्कृति को नई पहचान देने का काम किया है। राज्य में पहली बार जनजातीय नायकों, क्रांतिकारियों और स्थानीय वीर शख्सियतों के योगदान को सार्वजनिक मंचों पर सम्मान दिया गया।
इसके अलावा, वनाधिकार पट्टा वितरण में तेजी लाने से हजारों परिवारों को जमीन और आवास का कानूनी अधिकार मिला है। इससे न सिर्फ उनकी सुरक्षा बढ़ी है बल्कि आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
कुल मिलाकर, योगी सरकार द्वारा किए गए कदमों ने वंचित एवं जनजातीय समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। जहां पहले ये समुदाय उपेक्षित थे, वहीं अब विकास के केंद्र में हैं और अपनी पहचान को नए गौरव के साथ स्थापित कर रहे हैं।



