लाइफस्टाइल

बेटे ने कैंसर पीड़ित बच्चे का उड़ाया मजाक, पिता के तरीके पर सवाल

बेटे ने कैंसर पीड़ित बच्चे का उड़ाया मजाक, पिता ने सिखाना चाहा सबक

बच्चों की परवरिश के दौरान कई ऐसे मौके आते हैं, जब माता-पिता को उनके व्यवहार में सुधार करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ता है। खासकर जब बच्चा किसी दूसरे व्यक्ति की बीमारी, शारीरिक स्थिति या परेशानी का मजाक उड़ाता है, तो यह केवल अनुशासन का मामला नहीं रह जाता। यह उसे दूसरों की भावनाओं को समझाने और संवेदनशील बनने की सीख देने का भी अवसर होता है।

बच्चों को गलती का एहसास कराना क्यों जरूरी है?

बचपन में बच्चे कई बार बिना सोचे-समझे ऐसी बातें कह देते हैं, जिनसे दूसरों को दुख पहुंच सकता है। उन्हें हमेशा यह समझ नहीं होता कि उनके शब्द किसी व्यक्ति को कितना आहत कर सकते हैं। ऐसे में माता-पिता को बच्चे के व्यवहार को नजरअंदाज करने के बजाय उसे समझाना चाहिए कि बीमारी या किसी की कमजोरी का मजाक उड़ाना गलत है। हर व्यक्ति सम्मान और सहानुभूति का हकदार है।

सजा देने से ज्यादा जरूरी है व्यवहार के पीछे की सोच समझना

किसी गलती पर बच्चे को डांटना या सजा देना हमेशा उसके व्यवहार में स्थायी बदलाव नहीं लाता। कई बार बच्चा डर के कारण अपनी गलती स्वीकार कर लेता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह उसके पीछे की वजह को भी समझे। इसलिए माता-पिता को बच्चे से शांत तरीके से बात करनी चाहिए और यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि उसने ऐसा क्यों किया। इसके बाद उसे दूसरे व्यक्ति के नजरिए से स्थिति को देखने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

एक्सपर्ट क्यों देते हैं पेरेंटिंग के तरीके पर ध्यान देने की सलाह?

बच्चों को अनुशासन सिखाने के साथ-साथ उनके आत्मसम्मान और भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है। किसी गलती का जवाब अपमान, शर्मिंदा करने या बदला लेने के तरीके से देना बच्चे में डर और नाराजगी पैदा कर सकता है। बेहतर तरीका यह है कि माता-पिता स्पष्ट रूप से बताएं कि कौन-सा व्यवहार गलत था, उससे दूसरे व्यक्ति को क्या नुकसान हुआ और अगली बार बच्चे को किस तरह प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

बच्चों में सहानुभूति कैसे विकसित करें?

  • बच्चे से पूछें कि अगर कोई उसके साथ ऐसा व्यवहार करे, तो उसे कैसा महसूस होगा।

  • बीमारी या शारीरिक स्थिति को लेकर मजाक करने के बजाय सम्मान से बात करना सिखाएं।

  • गलती होने पर बच्चे को उसे स्वीकार करने और जरूरत पड़ने पर माफी मांगने के लिए प्रेरित करें।

  • दूसरों की मदद करने और उनकी भावनाओं का सम्मान करने का उदाहरण खुद पेश करें।

  • बच्चे के गलत व्यवहार की आलोचना करें, लेकिन उसे ही बुरा बच्चा कहकर उसकी पहचान न बनाएं।

माता-पिता का व्यवहार भी बच्चों के लिए उदाहरण बनता है

बच्चे अपने आसपास के बड़ों को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। यदि माता-पिता दूसरों के प्रति सम्मान, दया और संवेदनशीलता दिखाते हैं, तो बच्चों को भी इन गुणों को अपनाने का अवसर मिलता है। इसके विपरीत, घर में बार-बार अपमानजनक भाषा या दूसरों का मजाक उड़ाने का व्यवहार देखने पर बच्चा उसे सामान्य मान सकता है।

गलती सुधारने के साथ संवेदनशीलता सिखाना है जरूरी

बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को मजाक नहीं, बल्कि सम्मान और सहानुभूति की जरूरत होती है। माता-पिता का उद्देश्य केवल गलती पर प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि बच्चे को यह सिखाना होना चाहिए कि वह भविष्य में दूसरों के साथ बेहतर व्यवहार कैसे करे। शांत बातचीत, सही उदाहरण और जिम्मेदारी स्वीकार करने की सीख बच्चों में लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव लाने में मदद कर सकती है।

नोट: यह लेख सामान्य पेरेंटिंग जानकारी पर आधारित है। संबंधित घटना में पिता ने वास्तव में क्या किया और एक्सपर्ट ने किस खास तरीके पर सवाल उठाए, इसकी पुष्टि के लिए मूल लेख के विवरण को अलग से जांचना जरूरी है।

Computer Jagat 24

Founded in 2018, Computer Jagat24 has quickly emerged as a leading news source based in Lucknow, Uttar Pradesh. Our mission is to inspire, educate, and outfit our readers for a lifetime of adventure and stewardship, reflecting our commitment to providing comprehensive and reliable news coverage.

संबंधित समाचार

Back to top button