सावधान! प्रदूषण से आंखों में जलन? ये 8 गलतियां न करें, बढ़ सकता है इन्फेक्शन

बढ़ता वायु प्रदूषण केवल फेफड़ों या त्वचा को ही नहीं, बल्कि आंखों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। धूल, धुआं, पराग कण और जहरीली गैसें आंखों की सतह पर असर डालकर जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने जैसी समस्याएं पैदा करती हैं। कई लोग इन लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ गलत आदतें हालात को और बिगाड़ सकती हैं। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो आंखों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
सबसे पहली और आम गलती है—बार-बार आंखों को रगड़ना। जलन होने पर लोग अनजाने में आंखें मलने लगते हैं, जिससे हाथों के कीटाणु आंखों में पहुंच जाते हैं और कॉर्निया को नुकसान हो सकता है। दूसरी बड़ी गलती है बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल। हर आई ड्रॉप हर समस्या के लिए सही नहीं होती; गलत दवा संक्रमण को बढ़ा सकती है।
तीसरी गलती है—कॉन्टैक्ट लेंस की साफ-सफाई में लापरवाही। प्रदूषण के दिनों में गंदे या लंबे समय तक पहने गए लेंस आंखों में एलर्जी और इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं। चौथी गलती है—धूप और धूल में बिना चश्मे के निकलना। सुरक्षात्मक चश्मा आंखों को सीधे प्रदूषकों से बचाने में मदद करता है।
पांचवीं गलती है—आंखों को आराम न देना। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखें और ज्यादा ड्राई हो जाती हैं। छठी गलती है—कम पानी पीना। शरीर में पानी की कमी से आंखों में सूखापन और जलन बढ़ती है। सातवीं गलती है—गंदे तौलिए या रुमाल से आंखें पोंछना, जिससे बैक्टीरिया फैल सकते हैं। आठवीं और आखिरी गलती है—लक्षण बढ़ने पर भी डॉक्टर से सलाह न लेना।
आंखों की सुरक्षा के लिए साफ पानी से आंखें धोना, बाहर निकलते समय चश्मा पहनना, पर्याप्त पानी पीना और स्क्रीन टाइम सीमित करना जरूरी है। अगर जलन, दर्द या लालिमा लगातार बनी रहे, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर आप प्रदूषण के इस दौर में अपनी आंखों को सुरक्षित रख सकते हैं।



