फल-सब्जियां खाने से कम हो सकता है कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा

कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत और मलाशय को प्रभावित करने वाला कैंसर है। खान-पान और लाइफस्टाइल इसके जोखिम को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में संतुलित और पोषक डाइट को लंबे समय तक स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है।
फल और सब्जियों में फाइबर समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। एक मेटा-एनालिसिस में अधिक फल और सब्जियां खाने वाले लोगों में कम सेवन करने वालों की तुलना में कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम थोड़ा कम पाया गया था।
हालांकि, इस विषय पर हुई सभी रिसर्च एक जैसी नहीं हैं। कुछ बड़े अध्ययनों में फल-सब्जियों के सेवन और पूरे कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम के बीच संबंध कमजोर या स्पष्ट नहीं पाया गया। इसलिए सिर्फ फल-सब्जियां खाने को कैंसर से बचाव की गारंटी नहीं माना जा सकता।
हेल्दी डाइट में अलग-अलग तरह के फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त फाइबर शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना और धूम्रपान से बचना भी कैंसर के जोखिम को कम करने वाली समग्र जीवनशैली का हिस्सा हैं।
खास बात यह है कि फल और सब्जियां किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं। अगर किसी व्यक्ति में पेट दर्द, मल में खून, लगातार कब्ज या दस्त, बिना वजह वजन कम होना या मल त्याग की आदतों में लंबे समय तक बदलाव जैसे लक्षण हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इसलिए रोज की प्लेट में पर्याप्त फल और सब्जियां शामिल करना एक आसान और पौष्टिक आदत हो सकती है। लेकिन कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव के लिए केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय पूरी डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।



