ECG या Echo: कौन सा टेस्ट बताता है दिल का हाल?

दिल की सेहत को समझने के लिए डॉक्टर कई तरह के टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इनमें ECG और Echo सबसे आम जांचों में शामिल हैं। हालांकि दोनों का उद्देश्य दिल की स्थिति का आकलन करना है, लेकिन दोनों अलग-अलग पहलुओं की जानकारी देते हैं।
ECG यानी Electrocardiogram दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता है। इससे हार्ट रेट, धड़कन की लय और इलेक्ट्रिकल सिग्नल में होने वाली गड़बड़ी का पता लगाने में मदद मिलती है। यह अनियमित धड़कन और हार्ट अटैक के संकेतों की पहचान में भी उपयोगी हो सकता है।
वहीं Echo यानी Echocardiogram एक तरह का अल्ट्रासाउंड टेस्ट है, जिसमें साउंड वेव्स की मदद से दिल की तस्वीरें बनाई जाती हैं। इससे डॉक्टर दिल के आकार, मांसपेशियों की गति, पंपिंग क्षमता और हार्ट वाल्व की स्थिति को देख सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को धड़कन अनियमित होने, तेज या धीमी हार्टबीट जैसी समस्या है, तो ECG उपयोगी हो सकता है। दूसरी ओर, सांस फूलने, हार्ट वाल्व की समस्या, हार्ट मसल्स की कमजोरी या दिल की पंपिंग क्षमता जानने के लिए Echo की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए यह कहना सही नहीं है कि ECG या Echo में से कोई एक टेस्ट हमेशा बेहतर है। दोनों अलग-अलग जानकारी देते हैं और कई बार डॉक्टर मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर दोनों टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
अगर सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बेहोशी, अचानक तेज धड़कन या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों, तो खुद से टेस्ट चुनने के बजाय डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर ECG, Echo के अलावा ब्लड टेस्ट, स्ट्रेस टेस्ट या अन्य जांच भी सुझा सकते हैं।
आसान भाषा में समझें तो ECG दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि और रिदम को देखता है, जबकि Echo दिल की बनावट और उसके काम करने की क्षमता की तस्वीर दिखाता है। सही टेस्ट का चुनाव व्यक्ति की समस्या और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।



