कम उम्र में बढ़ रहा कमर दर्द

एक समय था जब कमर दर्द को मुख्य रूप से बुजुर्गों की समस्या माना जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
मोटापा कमर दर्द का एक बड़ा कारण माना जाता है। शरीर का अतिरिक्त वजन रीढ़ की हड्डी और कमर की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे दर्द और असहजता बढ़ सकती है। लंबे समय तक मोटापा रहने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार केवल मोटापा ही जिम्मेदार नहीं है। घंटों तक लैपटॉप या मोबाइल के सामने गलत मुद्रा में बैठना भी कमर दर्द को बढ़ावा देता है। खराब पोस्चर के कारण रीढ़ की हड्डी पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, जिससे मांसपेशियों में तनाव और दर्द पैदा हो सकता है।
इसके अलावा नियमित व्यायाम की कमी, कमजोर कोर मसल्स, पर्याप्त नींद न लेना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना भी कमर दर्द के जोखिम को बढ़ाते हैं। कई युवाओं में तनाव और मानसिक दबाव भी मांसपेशियों में जकड़न का कारण बन सकता है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि, सही बैठने की आदत, नियमित स्ट्रेचिंग और वजन नियंत्रण कमर दर्द से बचाव में मदद कर सकते हैं। काम के दौरान बीच-बीच में उठकर चलना और स्क्रीन की ऊंचाई सही रखना भी फायदेमंद हो सकता है।
यदि कमर दर्द लगातार बना रहे, पैरों तक फैलने लगे या दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करने लगे, तो विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।
नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी प्रकार के लगातार या गंभीर दर्द की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।



