भारत के इस राज्य में बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ा, लक्षण दिखें तो क्या करें और क्या नहीं?

भारत के एक राज्य में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) के मामलों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर हैं। बर्ड फ्लू एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करती है, लेकिन कुछ मामलों में यह इंसानों तक भी पहुंच सकती है। ऐसे में लोगों के मन में डर और कई सवाल होना स्वाभाविक है। सही जानकारी और सावधानी अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
बर्ड फ्लू के लक्षण पक्षियों और इंसानों में अलग-अलग हो सकते हैं। पक्षियों में अचानक मौत, सुस्ती, पंखों का झुक जाना, सांस लेने में परेशानी और अंडा उत्पादन में कमी जैसे संकेत दिखते हैं। वहीं इंसानों में बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और कभी-कभी दस्त जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखें और वह हाल ही में संक्रमित क्षेत्र में गया हो या मुर्गी-पालन से जुड़ा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
लक्षण दिखने पर सबसे पहले घबराने की बजाय मेडिकल सलाह लेना जरूरी है। नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच कराएं। बीमार महसूस करने पर खुद को अन्य लोगों से अलग रखें और मास्क का उपयोग करें। हाथों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें और बार-बार साबुन से हाथ धोएं। घर में कच्चे चिकन या अंडों को छूने के बाद हाथ जरूर धोएं और उन्हें अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
कुछ बातों से परहेज करना भी उतना ही जरूरी है। अफवाहों पर भरोसा न करें और बिना पुष्टि की जानकारी सोशल मीडिया पर न फैलाएं। कच्चा या अधपका चिकन और अंडे खाने से बचें। संक्रमित या मरे हुए पक्षियों को न छुएं और न ही खुद दफनाने की कोशिश करें, इसकी सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन या पशुपालन विभाग को दें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयां न लें।
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। यदि आप पोल्ट्री फार्म से जुड़े हैं तो बायो-सिक्योरिटी नियमों का सख्ती से पालन करें। सही समय पर जानकारी, सतर्कता और स्वच्छता अपनाकर बर्ड फ्लू के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जागरूक रहें, सुरक्षित रहें और जरूरत पड़ने पर तुरंत विशेषज्ञ की मदद लें।



