वायु प्रदूषण से 50% तक बढ़ रहे स्ट्रोक के मामले | जानें डॉक्टर की सलाह से कैसे करें बचाव

देश के कई हिस्सों में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर अब सिर्फ सांस से जुड़ी बीमारियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण भी बनता जा रहा है। हाल ही में आई एक मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण स्ट्रोक के मामले करीब 50% तक बढ़ गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10) खून में प्रवेश कर मस्तिष्क की नसों को प्रभावित करते हैं, जिससे ब्लड क्लॉट या ब्रेन हेमरेज की स्थिति बन सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है और फ्री रेडिकल्स बढ़ जाते हैं, जो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। यह स्थिति हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसे खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। खासतौर पर बुजुर्गों, हृदय रोगियों और मधुमेह के मरीजों को इसका अधिक खतरा होता है।
एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों के अनुसार, स्ट्रोक से बचाव के लिए कुछ सरल कदम अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले, सुबह या शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर अधिक होता है, तब बाहर टहलने से बचें। घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और अधिक से अधिक समय घर के अंदर बिताएं। भोजन में एंटीऑक्सीडेंट युक्त चीजें जैसे—फल, सब्जियां और विटामिन-सी शामिल करें। साथ ही, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें।
डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करवाते रहें। अगर अचानक सिर में तेज दर्द, बोलने में दिक्कत या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि यह स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
अंततः, वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। सरकार और आम जनता दोनों को मिलकर पेड़ लगाना, वाहनों का सीमित उपयोग करना और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाना होगा। तभी हम स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ सकते हैं।



