Glaucoma से बचना है तो बदलें अपनी ये 6 रोज़मर्रा की आदतें, आंखों की रोशनी रहेगी सुरक्षित

काला मोतिया यानी ग्लूकोमा आंखों की एक गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती है। अक्सर यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है और कई बार जब तक इसका पता चलता है, तब तक आंखों की नसों को काफी नुकसान हो चुका होता है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय रहते कुछ अच्छी आदतें अपना ली जाएं तो ग्लूकोमा के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सबसे पहली और महत्वपूर्ण आदत है नियमित आंखों की जांच करवाना। 40 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करवानी चाहिए। इससे आंखों के अंदर के दबाव यानी आई प्रेशर का पता चल जाता है और ग्लूकोमा का शुरुआती चरण में ही इलाज संभव हो जाता है।
दूसरी जरूरी आदत है संतुलित और पौष्टिक आहार लेना। हरी सब्जियां, गाजर, पालक, ब्रोकली, फल और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। ये पोषक तत्व आंखों की नसों को मजबूत रखते हैं और आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।
तीसरी आदत है नियमित व्यायाम करना। हल्की एक्सरसाइज, योग या रोजाना तेज कदमों से चलना शरीर के साथ-साथ आंखों के लिए भी फायदेमंद होता है। इससे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और आंखों के अंदर का दबाव नियंत्रित रहता है।
चौथी महत्वपूर्ण आदत है स्क्रीन टाइम को सीमित करना। मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का लगातार उपयोग आंखों पर दबाव डालता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इसे 20-20-20 नियम कहा जाता है, जो आंखों को आराम देता है।
पांचवीं आदत है धूम्रपान से दूरी बनाना। सिगरेट और तंबाकू का सेवन आंखों की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है और ग्लूकोमा का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए स्वस्थ आंखों के लिए धूम्रपान से बचना जरूरी है।
छठी और अंतिम आदत है पर्याप्त नींद लेना। अच्छी नींद आंखों को आराम देती है और उनकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखती है। लगातार कम नींद लेने से आंखों पर तनाव बढ़ सकता है।



