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Mysore Pak History: भारत की मिठाई कैसे बनी बांग्लादेश में ‘मंसूरी मिठाई’


भारत की मशहूर मिठाई Mysore Pak की शुरुआत 20वीं सदी में मैसूर के महल की रसोई से मानी जाती है। कहा जाता है कि इसे पहली बार मैसूर के महाराजा के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था। बेसन, घी और चीनी से बनी यह मिठाई अपने मुलायम और दानेदार टेक्सचर के कारण जल्द ही पूरे दक्षिण भारत में लोकप्रिय हो गई।
समय के साथ यह मिठाई व्यापार और प्रवासन के जरिए भारत की सीमाओं से बाहर भी पहुंची। बांग्लादेश में जब यह मिठाई पहुंची तो स्थानीय स्वाद और उच्चारण के अनुसार इसे नया नाम ‘मंसूरी मिठाई’ मिल गया। वहां यह खास मौकों और त्योहारों पर परोसी जाने वाली लोकप्रिय मिठाइयों में शामिल हो गई।
आज भी Mysore Pak अपनी पारंपरिक पहचान के साथ भारत और पड़ोसी देशों में उतनी ही पसंद की जाती है, और इसकी यह यात्रा इसे सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बनाती है।