Rasgulla History: ओडिशा या बंगाल, कहां बना था सबसे पहला रसगुल्ला?

रसगुल्ला यानी सफेद, मुलायम और चाशनी में डूबी वह मिठाई, जिसका नाम सुनते ही मुंह में मिठास घुल जाती है। लेकिन इस लोकप्रिय मिठाई की शुरुआत कहां हुई थी, इसे लेकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच लंबे समय से बहस चली आ रही है।
पश्चिम बंगाल का दावा है कि आधुनिक रसगुल्ले का आविष्कार 19वीं सदी में कोलकाता के मिठाई कारोबारी नवीन चंद्र दास ने किया था। माना जाता है कि उन्होंने 1868 के आसपास छेना से बनी इस मिठाई को तैयार किया, जिसे बाद में बंगाली रसगुल्ले के रूप में पहचान मिली।
वहीं, ओडिशा का दावा है कि रसगुल्ले की परंपरा इससे भी पुरानी है। ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की परंपरा से जुड़े ‘खीर मोहन’ या ‘रसगुल्ला’ जैसे व्यंजनों का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में सदियों से भगवान को रसगुल्ले जैसा प्रसाद अर्पित किया जाता रहा है।
रसगुल्ले की कहानी सिर्फ मिठाई की नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा की भी कहानी है। दोनों राज्यों में इसकी अपनी अलग पहचान और बनाने का तरीका है। बंगाली रसगुल्ला आमतौर पर हल्का और स्पंजी होता है, जबकि ओडिशा का रसगुल्ला अपनी अलग बनावट और स्वाद के लिए जाना जाता है।
इस विवाद के बीच वर्ष 2017 में ओडिशा रसगुल्ला को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) मिला, जबकि पश्चिम बंगाल को भी 2017 में ‘Banglar Rosogolla’ के लिए GI मान्यता मिली। दोनों की अपनी अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है।
आज रसगुल्ला भारत की पहचान से जुड़ी मिठाइयों में शामिल है। चाहे इसे ओडिशा की परंपरा से जोड़ें या बंगाल की आधुनिक खोज से, यह मिठाई देश-विदेश में भारतीय स्वाद की मिठास फैलाने का काम कर रही है।



