खराब खानपान की भरपाई नहीं कर सकते सप्लीमेंट्स, जानिए डॉक्टर का 90% हेल्थ फॉर्मूला

आजकल तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी दिनचर्या में लोग सेहत का ख्याल रखने के लिए सप्लीमेंट्स पर ज्यादा भरोसा करने लगे हैं। मल्टीविटामिन, प्रोटीन पाउडर, कैल्शियम टैबलेट या ओमेगा-3 जैसी चीजों को लोग यह सोचकर लेते हैं कि इससे खराब खानपान की भरपाई हो जाएगी। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह सोच पूरी तरह गलत है। हाल ही में विशेषज्ञों ने सेहत से जुड़ा एक अहम “90% नियम” बताया है, जो हर किसी को समझना चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार हमारी सेहत का करीब 90% हिस्सा हमारी रोजमर्रा की डाइट और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है, जबकि सप्लीमेंट्स की भूमिका सिर्फ 10% तक ही सीमित होती है। यानी अगर आपकी थाली में पोषण की कमी है, आप ज्यादा तला-भुना, जंक फूड या प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, तो सिर्फ गोलियां या पाउडर लेकर आप खुद को स्वस्थ नहीं रख सकते। शरीर को असली ताकत प्राकृतिक और संतुलित भोजन से ही मिलती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, दूध, दही, नट्स और बीजों में मौजूद पोषक तत्व शरीर को प्राकृतिक रूप से मिलते हैं, जिनका असर लंबे समय तक रहता है। वहीं सप्लीमेंट्स कृत्रिम होते हैं और इन्हें जरूरत पड़ने पर ही डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए। बिना जरूरत या ज्यादा मात्रा में सप्लीमेंट्स लेने से लिवर, किडनी और पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है।
डॉक्टर यह भी कहते हैं कि सप्लीमेंट्स का मकसद सिर्फ पोषण की कमी को पूरा करना होता है, न कि खराब आदतों को ढकना। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति रोज सब्जियां नहीं खाता, पानी कम पीता है और नींद भी पूरी नहीं करता, तो केवल विटामिन टैबलेट उसे फिट नहीं बना सकती। सही समय पर खाना, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव से दूरी—ये सभी सेहत के 90% नियम का हिस्सा हैं।
निष्कर्ष यही है कि अगर आप सच में स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपनी डाइट सुधारें। सप्लीमेंट्स को जादुई समाधान मानने की बजाय उन्हें सहायक के रूप में देखें। याद रखें, अच्छी सेहत की नींव आपकी थाली से शुरू होती है, न कि दवा की शीशी से।



