हामिद अंसारी के बयान पर विवाद, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने जताई असहमति

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की हालिया टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद शुरू हो गया है। 18 सितंबर को एजी नूरानी स्मृति व्याख्यान में अंसारी ने एक पुस्तक का हवाला देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उस टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को भारत के लिए बड़ा खतरा बताया गया था।
अंसारी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उभार को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि धार्मिक पहचान के आधार पर नागरिकों के बीच अंतर किए जाने की स्थिति बन सकती है। उनके इस बयान पर भाजपा नेताओं और विश्व हिंदू परिषद की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई।
वहीं, कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी अंसारी के बयान से दूरी बनाई है। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी ने कहा कि किसी भी समुदाय के लोगों को भारत में बाहरी जैसा महसूस नहीं कराया जाना चाहिए और नेताओं को ऐसी भाषा से बचना चाहिए जिससे सामाजिक विभाजन बढ़े।
अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने भी अंसारी की टिप्पणी की आलोचना की और कहा कि ऐसी बयानबाजी से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। उनके बयान और अंसारी की मूल टिप्पणी—दोनों अलग-अलग पक्षों के सार्वजनिक राजनीतिक-सामाजिक मत हैं।



