टीवी चैनलों को सरकार की सख्त एडवाइजरी, भड़काऊ बहस और AI के गलत इस्तेमाल पर चेतावनी

केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को प्रसारण के दौरान अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। 21 अक्टूबर को जारी एडवाइजरी में मंत्रालय ने कहा कि सभी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स, 1994 के तहत निर्धारित प्रोग्राम कोड का पालन करना चाहिए। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ चैनलों पर प्रसारित सामग्री में इन नियमों की भावना के अनुरूप सावधानी नहीं बरती जा रही थी।
भड़काऊ और सांप्रदायिक बहस पर रखनी होगी नजर
सरकार ने न्यूज चैनलों को लाइव डिबेट और पैनल चर्चाओं के दौरान संपादकीय नियंत्रण मजबूत करने की सलाह दी है। चैनलों से कहा गया है कि वे वक्ताओं और पैनलिस्टों का चयन सावधानी से करें तथा कार्यक्रम से पहले उन्हें नियमों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाएं। यदि किसी चर्चा में अपमानजनक, अभद्र, सांप्रदायिक या भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल होता है, तो जरूरत पड़ने पर संबंधित वक्ता को म्यूट करने, डिस्क्लेमर देने, कार्यक्रम रोकने या प्रसारण बंद करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज से बचने की सलाह
एडवाइजरी में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज से बचने पर जोर दिया गया है। ऐसे अभियानों की वास्तविक समय में जानकारी प्रसारित होने से सुरक्षा बलों और नागरिकों की जान को खतरा हो सकता है। मंत्रालय ने इस तरह की कवरेज के बजाय अधिकृत सरकारी अधिकारियों की ओर से दी जाने वाली नियमित जानकारी पर भरोसा करने की व्यवस्था का उल्लेख किया है। यह निर्देश राष्ट्रीय सुरक्षा और अभियान में शामिल लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है।
हिंसक दृश्यों और अपराध की खबरों में बरतें सावधानी
सरकार ने अपराध, हिंसा, दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी खबरों को सत्यापित तथ्यों के आधार पर संतुलित तरीके से प्रस्तुत करने की सलाह दी है। परेशान करने वाले दृश्यों को बार-बार दिखाने से बचने और जरूरत पड़ने पर उन्हें ब्लर या मास्क करने की बात कही गई है। मंत्रालय ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की रिपोर्टिंग में विशेष सतर्कता बरतने तथा यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान उजागर न होने देने पर भी जोर दिया है।
AI के इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी
टीवी कार्यक्रमों, ग्राफिक्स और वर्चुअल न्यूज प्रेजेंटेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा जनरेटिव AI के इस्तेमाल को लेकर भी मंत्रालय ने सावधानी बरतने को कहा है। एडवाइजरी के अनुसार, AI का उपयोग सहायक भूमिका तक सीमित रखा जाना चाहिए और इससे खबरों की सटीकता, प्रामाणिकता या संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसका उद्देश्य ऐसी सामग्री के प्रसारण के जोखिम को कम करना है जो देखने में वास्तविक लगे, लेकिन तथ्यात्मक रूप से गलत या भ्रामक हो।
भारत के नक्शे और संवेदनशील खबरों पर निर्देश
मंत्रालय ने प्रसारण, ग्राफिक्स और डिजिटल प्रस्तुतियों में सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित प्रामाणिक नक्शों के इस्तेमाल की सलाह दी है। प्राकृतिक आपदाओं, बड़े हादसों और अन्य संवेदनशील घटनाओं के दृश्य दिखाते समय जरूरत के अनुसार समय और तारीख का उल्लेख करने को भी कहा गया है, ताकि पुरानी तस्वीरों या वीडियो के कारण अनावश्यक भ्रम और घबराहट न फैले। खबरों में सत्यापन और संदर्भ स्पष्ट रखना इस एडवाइजरी का अहम हिस्सा है।
नियमों के उल्लंघन पर हो सकती है कार्रवाई
सरकार ने टीवी चैनलों को अपने संपादकीय और कंटेंट समीक्षा तंत्र को मजबूत करने की सलाह दी है। समाचार जुटाने, संपादन, प्रोडक्शन और प्रसारण से जुड़े कर्मचारियों को प्रोग्राम कोड के प्रावधानों के बारे में नियमित प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन होने पर केबल टेलीविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट, 1995 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
मीडिया की जिम्मेदारी और खबरों की विश्वसनीयता पर जोर
इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य टीवी प्रसारण में तथ्यात्मक सटीकता, जिम्मेदार रिपोर्टिंग और संवेदनशील विषयों पर संपादकीय सावधानी को बढ़ावा देना है। आतंकवाद, सांप्रदायिक तनाव, अपराध और हिंसा जैसी खबरों में सनसनीखेज प्रस्तुति से दर्शकों में भ्रम या अनावश्यक चिंता पैदा हो सकती है। वहीं, AI से तैयार सामग्री के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उसकी सत्यता की जांच भी महत्वपूर्ण है। चैनलों को इन निर्देशों के तहत अपनी संपादकीय प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी होगी और प्रसारण के दौरान नियमों के अनुपालन पर ध्यान देना होगा।



