बिहार SIR: नए फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि नए फॉर्म-6 की वैधता पर बिहार SIR मामले में कोई फैसला नहीं दिया गया था। जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत ने न इसे मंजूरी दी है और न ही अस्वीकार किया है। इसलिए पिछली सुनवाई की टिप्पणियों को नए फॉर्म पर अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
क्या है फॉर्म-6?
फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में पहली बार नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने वाले पात्र नागरिक करते हैं। मौजूदा विवाद ऑनलाइन फॉर्म के साथ जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर है। इसमें आवेदकों से यह जानकारी मांगी जाती है कि क्या उनका या उनके निर्धारित पारिवारिक सदस्यों का नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था। इस अतिरिक्त जानकारी की अनिवार्यता और इसे लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
चुनाव आयोग के दावे पर क्यों उठा सवाल?
विवाद तब बढ़ा जब चुनाव आयोग के 26 सितंबर के बयान को इस तरह समझा गया कि नए फॉर्म से जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में इस दावे पर सवाल उठाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मई में बिहार SIR पर दिए गए फैसले में नए फॉर्म-6 की जांच नहीं हुई थी, क्योंकि वह उस समय विचाराधीन मुद्दा नहीं था।
नए घोषणा-पत्र को लेकर क्या है विवाद?
नए घोषणा-पत्र में आवेदकों से पुराने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में स्वयं या परिवार के निर्धारित सदस्यों के नाम होने के संबंध में जानकारी मांगी जाती है। इस बदलाव को लेकर प्रक्रिया और कानूनी आधार पर आपत्तियां सामने आई हैं। याचिकाकर्ताओं का पक्ष है कि अतिरिक्त शर्तें पहली बार मतदाता बनने वाले कुछ लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं। हालांकि, इन आपत्तियों और फॉर्म की वैधता पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है।
आगे कब होगी सुनवाई?
नए फॉर्म-6 और चुनाव आयोग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं पर आगे सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय की है। अदालत ने संकेत दिया है कि संशोधित फॉर्म के मुद्दे पर उचित कानूनी चुनौती के आधार पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल इस फॉर्म को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त होने या अदालत द्वारा खारिज किए जाने का दावा करना सही नहीं होगा।



