सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की धरपकड़

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने विशेष रूप से उन लोगों का उल्लेख किया जो ऐसे क्षेत्रों में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होते हैं, जहां निषेधाज्ञा लागू नहीं है। इस निर्देश का उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना है।
दूसरे दिन भी सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया
अदालत के निर्देशों के बावजूद दिल्ली में प्रदर्शन के दूसरे दिन भी पुलिस की कार्रवाई जारी रही। रिपोर्टों के अनुसार, कनॉट प्लेस और अन्य इलाकों में छोटे समूहों में प्रदर्शन कर रहे लोगों को बसों में बैठाकर ले जाया गया। कुछ रिपोर्टों में रविवार को लगभग 700 लोगों को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख है, जबकि पुलिस ने करीब 400 लोगों की हिरासत की जानकारी दी। हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।
चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
ये प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि मतदाता सूची में सुधार का उद्देश्य गलत और दोहराए गए नामों की पहचान करना है। इन आरोपों और दावों पर विवाद जारी है।
मेट्रो, इंटरनेट और आवाजाही पर भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केवल हिरासत के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर भी निर्देश दिए। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने तथा इंटरनेट सेवाओं को बाधित नहीं करने को कहा, हालांकि कानून-व्यवस्था से जुड़ी वैध पाबंदियां लागू रह सकती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाना चाहिए।
अधिकारियों से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व निर्देशों के कथित उल्लंघन को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार के गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रमुख को नोटिस जारी किया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन रोकने के लिए परिवहन सेवाओं और लोगों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंध अदालत के पहले के आदेशों के अनुरूप नहीं थे। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अधिकारियों के जवाब और आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद ही निकलेगा।



