
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक जनसभा में देश की सुरक्षा और नागरिकता संबंधी मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठियों के मामले में अब कोई समझौता नहीं होगा और ऐसे लोगों को मतदाता सूची से हटाने के साथ-साथ देश से भी खदेड़ दिया जाएगा। अमित शाह ने विशेष रूप से यह बात जोर देते हुए कही कि यह केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता भी है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई अवैध घुसपैठियों को राजनीतिक संरक्षण और आश्रय प्रदान किया गया, जिससे देश की नागरिकता और मतदाता प्रक्रिया प्रभावित हुई।
अमित शाह ने आगे कहा कि देश में कानून और संविधान का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है और अवैध तरीके से रह रहे लोगों को अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा बनाई गई नई नीतियों और सुधारों के तहत घुसपैठियों की पहचान और उनकी वैधानिक स्थिति का गहन अध्ययन किया जा रहा है। उनका कहना था कि मतदाता सूची में अवैध रूप से शामिल लोग केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा नहीं डालते, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा उत्पन्न करता है।
इसके अलावा अमित शाह ने कहा कि घुसपैठियों के मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से नहीं बल्कि देश की सुरक्षा और कानून के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो ऐसे मामलों की जांच कर रही हैं और समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार अब अवैध घुसपैठियों को लेकर शून्य सहिष्णुता नीति अपनाने जा रही है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC) जैसे मुद्दों को भी जोर देते हुए कहा कि इन उपायों का उद्देश्य केवल अवैध रूप से रह रहे लोगों को पहचानना और उन्हें कानून के दायरे में लाना है, न कि किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ कार्रवाई करना। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सभी प्रक्रियाएँ पारदर्शी और न्यायसंगत होंगी। उनके अनुसार, देश की जनता और कानून का सम्मान सर्वोपरि है, और किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



