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आज के समय में एआई के बारे में जानकारी बहुत जरूरी: पत्रकार और लेखक दीप जगदीप सिंह

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बारे में पैदा की जा रही आशंकाएं निराधार हैं, हमें आज की तकनीक और इसके लोगों के अनुकूल और रचनात्मक उपयोग के लिए इसके अनुप्रयोगों के बारे में जानना चाहिए।

यह विचार पत्रकार, अनुवादक एवं लेखक दीप जगदीप सिंह ने पंजाबी लेखक संघ रामपुर की मासिक बैठक के दौरान संघ के पुस्तकालय के सेमिनार हॉल में व्यक्त किए, जिसमें बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे।

यह बैठक पंजाबी लेखक संघ रामपुर की लेखक संवाद श्रृंखला के तहत आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष अनिल फतेहगढ़ जट्टां ने की। बैठक की शुरुआत में संघ के अध्यक्ष अनिल फतेहगढ़ जट्टां ने लेखकों का स्वागत किया। बैठक में हाल ही में दिवंगत हुए लेखक हरभजन मांगट और लेखिका नेतर मुत्तो की बहन तेज कौर के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।

इसके बाद लेखक संवाद श्रृंखला के अंतर्गत पंजाबी साहित्य अकादमी लुधियाना के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य दीप जगदीप सिंह के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय पर बातचीत हुई, जो तकनीक के माध्यम से मातृभाषा को समकालीन बनाने के लिए काम कर रहे हैं। इस विषय पर बोलते हुए दीप जगदीप सिंह ने कहा कि मनुष्य हमेशा से ही प्रकृति की नकल करता रहा है।

उन्होंने पक्षियों को देखकर हवाई जहाज़ और आँखों को देखकर कैमरा बनाया। अब उन्होंने मानव बुद्धि की नकल करने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी बनाई है।

आज के समय में हमें इसके बारे में पता होना चाहिए। इसके बारे में जानकारी का अभाव बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने एआई के बारे में लोगों की आशंकाओं को निराधार बताया।

उन्होंने कहा कि एआई को इंसानों से आगे निकलने में एक सदी और लग सकती है। चर्चा के चरम पर मौजूद लेखकों ने दीप जगदीप से इस विषय पर गंभीर और सटीक सवाल पूछे, जिनका उन्होंने सहजता से जवाब दिया। इस विचारपूर्ण चर्चा ने साहित्य जगत में एक नई पहल की शुरुआत की है।

इसके बाद साहित्य सृजन का दौर बलवंत मंगत के मानवीय चेतना से संबंधित लेख ‘नेति नेति मैं’ से शुरू हुआ, जिस पर विस्तार से चर्चा की गई।

इसके बाद इंद्रजीत सिंह, करनैल सिवियां, कवलजीत नीलों, सरदार पंछी, तरन रामपुर, विश्विंदर रामपुर, जोरावर पंछी, हरबंस मालवा और गुरदयाल दलाल ने अपनी काव्य रचनाएं सुनाईं, जिनमें पर्यावरण संरक्षण, पेड़ लगाना और उनका रखरखाव, सांप्रदायिकता के माहौल में इंसान की बेबसी, सोच में क्रांति और अन्य विषयों पर काव्यात्मक विचार व्यक्त किए गए।

बैठक में श्रोता के तौर पर सुरिंदर रामपुरी, गुरदीप महोन, कुलदीप सिंह, हरजिंदर सिंह, बलविंदर सिंह पुडैन, अमरिंदर सोहल, प्रभजोत रामपुर, सुखजीवन रामपुर, गुरभगत, पम्मी हबीब, डॉ. ताहिल सिंह जस्सल और प्रीत सिंह संदल ने हिस्सा लिया। बैठक में पहली बार शामिल हुए बलविंदर सिंह पुडैन, इंद्रजीत सिंह और हरजिंदर सिंह का एसोसिएशन की ओर से स्वागत किया गया।

इस दौरान एसोसिएशन के संरक्षक सुरिंदर रामपुरी ने अपनी नई प्रकाशित पुस्तक ‘किसी बहाने’ तथा एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य गुरदयाल दलाल ने अपनी नई पुस्तक ‘जल भ्रम टन वापसी’ एसोसिएशन को भेंट की। अंत में एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल फतेहगढ़ जट्टां ने बैठक में आए सभी लेखकों और अतिथियों का धन्यवाद किया।

बैठक की कार्यवाही का संचालन एसोसिएशन के महासचिव बलवंत मांगट ने बहुत ही सक्रियता से किया। एसोसिएशन की कार्यवाही के दौरान प्रशासनिक कार्यों को प्रभजोत रामपुर, तरन रामपुर, गुरदीप महोन और एसोसिएशन की सचिव नीतू रामपुर ने बहुत ही व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया।

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