
मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत और रूस ने आपसी सहयोग को मजबूत करने और संभावित आर्थिक प्रभावों का आकलन करने के लिए उच्च स्तरीय चर्चा करने का निर्णय लिया है। खासतौर पर खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर पड़ रहा है, जिसमें इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) भी शामिल है। यह कॉरिडोर भारत, रूस और ईरान के बीच व्यापार को तेज और सस्ता बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव इसके सुचारु संचालन के लिए चुनौती बन सकता है।
भारत और रूस दोनों ही देश इस कॉरिडोर को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं, क्योंकि यह पारंपरिक समुद्री मार्गों के मुकाबले कम समय और लागत में माल परिवहन की सुविधा देता है। खाड़ी क्षेत्र में यदि तनाव बढ़ता है, तो समुद्री सुरक्षा, बीमा लागत और लॉजिस्टिक्स पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे INSTC की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण दोनों देश इस विषय पर विस्तृत मंथन कर संभावित जोखिमों को कम करने के उपाय तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
चर्चा में ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे भी प्रमुख रूप से शामिल होंगे। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी निर्भर है, इस स्थिति को लेकर विशेष रूप से सतर्क है। वहीं रूस भी पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच वैकल्पिक व्यापार मार्गों और साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में INSTC दोनों देशों के लिए एक अहम कड़ी बनकर उभरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और रूस समय रहते रणनीतिक कदम उठाते हैं, तो वे इस कॉरिडोर को सुरक्षित और प्रभावी बनाए रख सकते हैं। इसके लिए क्षेत्रीय सहयोग, वैकल्पिक मार्गों का विकास और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकती है, बल्कि वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है।



