Kiren Rijiju Statement: ‘दिमागी नक्सलियों और देशभक्तों के बीच जंग’, रिजिजू का बड़ा बयान

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को कहा कि देश में ‘दिमागी नक्सलियों’ और देशभक्त भारतीयों के बीच लड़ाई की लकीर खिंच गई है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस विवाद को भारतीय संविधान में विश्वास रखने वालों और अराजकतावादियों के बीच संघर्ष के रूप में पेश किया। रिजिजू ने अपनी एक अन्य पोस्ट में देशभक्त भारतीयों से कथित देशद्रोहियों को याद रखने की बात भी कही। यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
प्रशांत भूषण की टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद
रिजिजू का बयान वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता प्रशांत भूषण की ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन संबंधी टिप्पणी के बाद सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, भूषण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह टिप्पणी की थी। इसके बाद रिजिजू ने भूषण के दो वीडियो एक्स पर साझा किए और आरोप लगाया कि कुछ लोग कश्मीर तथा पूर्वोत्तर को भारत से अलग करना चाहते हैं। ये आरोप रिजिजू की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
एक्स पर पोस्ट और वीडियो साझा कर साधा निशाना
किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने विचार रखे और प्रशांत भूषण के बयानों से जुड़े वीडियो साझा किए। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता का मुद्दा उठाया। उनके बयान में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सली’ और ‘देशभक्त भारतीय’ जैसे शब्दों ने राजनीतिक विमर्श को और तीखा कर दिया है। इस घटनाक्रम में सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो विवाद के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
‘दिमागी नक्सली’ शब्द को लेकर पहले भी हो चुका है विवाद
‘दिमागी नक्सली’ शब्द को लेकर इससे पहले भी राजनीतिक बहस हो चुकी है। अगस्त 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी के बाद विपक्षी नेताओं और कुछ आलोचकों ने सवाल उठाया था कि क्या सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को भी इस श्रेणी में रखा जा रहा है। इसके बाद किरेन रिजिजू ने सफाई दी थी कि केवल सरकार से असहमति जताने या उसकी आलोचना करने वाला व्यक्ति अपने आप ‘दिमागी नक्सली’ नहीं हो जाता। उन्होंने इस शब्द को अलगाववाद, माओवादी विचारधारा के समर्थन और संवैधानिक व्यवस्था के विरोध जैसे संदर्भों से जोड़ा था।
संविधान, देशभक्ति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस
रिजिजू के ताजा बयान ने देशभक्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है। एक ओर मंत्री ने अपने बयान में संविधान और राष्ट्रीय एकता का मुद्दा उठाया, वहीं दूसरी ओर इस तरह के राजनीतिक शब्दों के इस्तेमाल पर असहमति और आलोचना की गुंजाइश को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सरकार की आलोचना, शांतिपूर्ण राजनीतिक असहमति और अलगाववादी गतिविधियों के बीच अंतर को समझना इस बहस का अहम पहलू है।
राजनीतिक घटनाक्रम पर सबकी नजर
प्रशांत भूषण की टिप्पणी और किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में इस बयान के आधार पर किसी नई कानूनी कार्रवाई या आधिकारिक जांच की पुष्टि नहीं की गई है। आने वाले दिनों में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस विवाद की दिशा को और स्पष्ट कर सकती हैं।



