
शिक्षक शिक्षा संस्थानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने NCTE के उस अधिकार को वैध ठहराया है, जिसके तहत वह मान्यता प्राप्त Teacher Education Institutions (TEIs) से हर वर्ष Performance Appraisal Report यानी PAR मांग सकता है। इस फैसले के साथ दिल्ली हाई कोर्ट के 2023 के उस निर्णय को पलट दिया गया, जिसमें NCTE के इस कदम पर सवाल उठाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और जवाबदेही बनाए रखना केवल औपचारिक नियामक प्रक्रिया नहीं है। अच्छे शिक्षक तैयार करने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली पर नजर रखना जरूरी है। कोर्ट ने माना कि NCTE को संस्थानों से प्रदर्शन संबंधी जानकारी हासिल करने का अधिकार उसकी नियामक जिम्मेदारियों से जुड़ा हुआ है।
मामला NCTE की ओर से 2019 में जारी किए गए एक सार्वजनिक नोटिस से जुड़ा था। इस नोटिस में NCTE से मान्यता प्राप्त शिक्षक शिक्षा संस्थानों को वार्षिक Performance Appraisal Report ऑनलाइन जमा करने के लिए कहा गया था। इस रिपोर्ट में संस्थानों की विभिन्न गतिविधियों और वित्तीय जानकारी से संबंधित विवरण भी शामिल थे।
कुछ शिक्षक शिक्षा संस्थानों ने इस व्यवस्था को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि NCTE की कार्यकारी समिति को इस तरह की रिपोर्ट अनिवार्य करने का स्वतंत्र अधिकार नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 2023 में संस्थानों की दलील को स्वीकार करते हुए संबंधित सार्वजनिक नोटिस को रद्द कर दिया था।
इसके बाद NCTE ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि NCTE की General Body ने पहले ही Performance Appraisal Report व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया था और Executive Committee को इसे लागू करने के लिए अधिकृत किया गया था। इसलिए Member Secretary द्वारा जारी नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने NCTE Act की धारा 12(k) का भी उल्लेख किया। इस प्रावधान के तहत परिषद को मान्यता प्राप्त संस्थानों में जवाबदेही लागू करने के लिए उपयुक्त performance appraisal system, norms और mechanisms विकसित करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि PAR की व्यवस्था इसी नियामक दायित्व का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी नियामक संस्था की जिम्मेदारियों को केवल कानून में लिखे गए शब्दों तक सीमित नहीं किया जा सकता। यदि कोई कदम उसके वैधानिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए जरूरी और संबंधित है, तो वह incidental और ancillary regulatory power के दायरे में आ सकता है।
फैसले में जवाबदेही को प्रशासनिक कानून का महत्वपूर्ण सिद्धांत बताया गया। कोर्ट के अनुसार किसी संस्था की जिम्मेदारी तय करने के लिए उसकी responsibility, answerability और enforceability सुनिश्चित होना जरूरी है। शिक्षक शिक्षा संस्थानों की निगरानी में PAR जैसी व्यवस्था इसी उद्देश्य को पूरा कर सकती है।
इस फैसले का सीधा असर NCTE से मान्यता प्राप्त शिक्षक शिक्षा संस्थानों पर पड़ेगा। संस्थानों को नियामक आवश्यकताओं के अनुसार अपनी Performance Appraisal Report जमा करनी होगी। NCTE की आधिकारिक वेबसाइट पर भी Performance Appraisal Report से संबंधित व्यवस्था उपलब्ध है।
फैसले का व्यापक महत्व शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता काफी हद तक प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों पर निर्भर करती है। इसलिए शिक्षक तैयार करने वाले संस्थानों की जवाबदेही और मानकों की निगरानी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से NCTE को शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की निगरानी के लिए एक स्पष्ट कानूनी आधार मिला है। इससे संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निर्धारित मानकों के पालन को मजबूत करने की उम्मीद है।



