
असम की राजनीति में इस समय महिला वोटरों को साधने को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। दोनों प्रमुख पार्टियां—भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस—महिलाओं को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग योजनाओं और वादों पर जोर दे रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, असम में महिला मतदाताओं की भूमिका चुनाव परिणामों को तय करने में अहम साबित होती है। इसी वजह से पार्टियां महिलाओं से जुड़े मुद्दों जैसे रोजगार, सुरक्षा और आर्थिक सहायता पर विशेष फोकस कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जो भी पार्टी महिला वोट बैंक को अपने पक्ष में करने में सफल होगी, उसे चुनावी बढ़त मिल सकती है। हालांकि, अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि जनता इन वादों पर कितना भरोसा करती है और जमीन पर उनका कितना असर दिखता है।
महिला वोटरों को आकर्षित करने के लिए दोनों दलों ने अपने-अपने स्तर पर जमीनी अभियान भी तेज कर दिए हैं। गांवों और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं से सीधे संवाद, लाभार्थी योजनाओं का प्रचार और स्थानीय मुद्दों पर फोकस करके पार्टियां अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
पिछले कुछ चुनावों के रुझानों को देखें तो यह साफ होता है कि महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत भी बढ़ी है। यही वजह है कि असम में इस बार महिलाओं से जुड़े मुद्दे चुनावी एजेंडे के केंद्र में आ गए हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि वास्तविक लाभ और भरोसे के आधार पर ही महिला वोट बैंक किसी भी पार्टी के पक्ष में झुकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि ज़मीनी स्तर पर किस पार्टी की रणनीति ज्यादा असर दिखाती है।



