SC ने खारिज की रोज प्रस्तावना पढ़ने की PIL

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्कूलों की सुबह की असेंबली में संविधान की प्रस्तावना का रोजाना पाठ अनिवार्य करने की मांग वाली PIL पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत की पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी।
यह याचिका दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर धीरज कुमार ने दाखिल की थी। इसमें केंद्र के शिक्षा मंत्रालय और CBSE को स्कूली बच्चों में संवैधानिक जागरूकता बढ़ाने के लिए देशभर में एक समान नीति बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता की दलील थी कि जिस तरह स्कूलों में राष्ट्रगान का सामूहिक पाठ किया जाता है, उसी तरह संविधान की प्रस्तावना का नियमित पाठ कराने से बच्चों में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों की समझ विकसित हो सकती है।
याचिका में राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्कूल असेंबली के दौरान प्रस्तावना के पाठ से जुड़ी पहलों का भी उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ता ने इन्हें संवैधानिक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने वाले मॉडल के तौर पर पेश किया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्रस्तावना पहले से ही स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल है। अदालत ने कहा कि इसे छात्रों को छठी कक्षा से पढ़ाया जाता है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21A और अनुच्छेद 51A(a) का भी हवाला दिया गया था। साथ ही मई 2025 के CBSE सर्कुलर का उल्लेख किया गया, जिसमें स्कूल असेंबली के दौरान दैनिक सकारात्मक प्रतिज्ञाओं को प्रोत्साहित किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्तावना के अनिवार्य दैनिक पाठ के लिए अलग राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग को स्वीकार नहीं किया।



