SIR Voter List: 15% आबादी हटाने पर पूर्व CEC कुरैशी का तंज

देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने दावा किया कि SIR की कवायद में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए हैं।
कुरैशी ने कहा कि इस प्रक्रिया के जरिए करीब 14 से 15 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हट गए। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में आयोग से पूछा कि यदि SIR का एक प्रमुख उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान करना था, तो इस प्रक्रिया के बाद कितने अवैध प्रवासी मिले, इसका आंकड़ा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पूर्व CEC ने मतदान के अधिकार को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि वोट देना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और किसी पात्र व्यक्ति का नाम प्रक्रिया संबंधी कारणों से मतदाता सूची से हटना गंभीर विषय है। उन्होंने SIR की प्रक्रिया की पारदर्शिता और उसके प्रभाव पर सवाल उठाए हैं।
कुरैशी का यह बयान ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में SIR के बाद मतदाता सूची के आंकड़ों में बड़ी कमी सामने आई है। कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी ड्राफ्ट सूचियों में पिछली सूची की तुलना में मतदाताओं की संख्या कम हुई है।
उदाहरण के तौर पर 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तीसरे चरण के बाद ड्राफ्ट सूची में 2024 लोकसभा चुनाव के मुकाबले करीब 6.15 करोड़ कम मतदाता दर्ज हुए। हालांकि यह आंकड़ा अंतिम सूची का नहीं है और दावे-आपत्तियों के बाद इसमें बदलाव संभव है।
चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। इसके तहत मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित, डुप्लीकेट या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान की जाती है। आयोग के अनुसार प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना भी है।
SIR को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ड्राफ्ट सूची से नाम गायब होने का मतलब अंतिम रूप से मताधिकार समाप्त होना नहीं है। पात्र नागरिकों को दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है, जिसके बाद संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाती है।
इस मुद्दे पर विपक्षी दल भी लगातार सवाल उठा रहे हैं और बड़े पैमाने पर नाम कम होने को लेकर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं। दूसरी ओर आयोग प्रक्रिया को मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाने की कवायद के तौर पर देखता है।
उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में मतदाता सूची से जुड़े रिकॉर्ड की जांच और अपडेट की प्रक्रिया भी चल रही है। आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर मतदाता अपने पुराने SIR रिकॉर्ड में नाम की जानकारी खोज सकते हैं।
कुल मिलाकर SIR को लेकर पूर्व CEC एसवाई कुरैशी की टिप्पणी ने मतदाता सूची पुनरीक्षण पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। एक तरफ बड़े पैमाने पर मतदाताओं की संख्या घटने पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अंतिम सूची से पहले दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के कारण मौजूदा आंकड़ों को अंतिम निष्कासन के रूप में नहीं देखा जा सकता।



