Akshaya Navami 2025: कब है अक्षय नवमी, पूजा विधि, व्रत कथा और इस दिन का धार्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार अक्षय नवमी का पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह पावन तिथि 1 नवंबर 2025, शनिवार के दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय नवमी का दिन दान, स्नान, पूजन और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन किए गए सभी शुभ कर्म, दान और पूजा के फल अक्षय (अविनाशी) होते हैं यानी उनका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता।
अक्षय नवमी को ‘आंवला नवमी’ या ‘अक्षय व्रत’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने सत्ययुग की स्थापना की थी, इसलिए इसे सत्ययुग का आरंभ दिवस भी कहा जाता है। इस अवसर पर भक्त आंवले के वृक्ष की पूजा करते हैं, क्योंकि आंवला को भगवान विष्णु का प्रिय फल माना गया है। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा और कथा श्रवण करती हैं।
शास्त्रों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति इस दिन स्नान, दान और व्रत करता है, उसे अखंड सौभाग्य, आरोग्य और समृद्धि प्राप्त होती है। पितरों को तर्पण और ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितृदोष का निवारण भी होता है। कई स्थानों पर यह दिन आंवला नवमी मेला के रूप में भी मनाया जाता है, जहां भक्तजन आंवले के वृक्षों की पूजा करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं।
अक्षय नवमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व इस बात में निहित है कि यह दिन सत्कर्मों को अक्षय फल देने वाला होता है। इस दिन की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति, धन और समृद्धि लाती है। इसलिए हर हिंदू परिवार में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।



