फुलेरा दूज 2026: श्रीराधा-कृष्ण पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

फुलेरा दूज, जिसे आमतौर पर फुलेरा द्वितीया के नाम से जाना जाता है, व्रत और पूजा के लिए अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। यह दिन खासकर श्रीराधा-कृष्ण की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी होता है। फुलेरा दूज का पर्व वसंत ऋतु में आता है और इसे फूलों की देवी-भक्ति और प्राकृतिक सौंदर्य के प्रतीक के रूप में भी माना जाता है। इस दिन भक्तजन अपने घरों और मंदिरों को रंग-बिरंगे फूलों से सजाते हैं और श्रीकृष्ण और राधा के सुंदर चित्रों या मूर्तियों के सामने पूजा करते हैं।
इस दिन पूजा का शुभ समय (मुहूर्त) बहुत महत्वपूर्ण होता है। वर्ष 2026 में फुलेरा दूज का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक रहेगा। इस समय में पूजा करने से देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा की शुरुआत साफ-सुथरे स्थान पर पवित्र जल से हाथ-मुँह धोकर करनी चाहिए। इसके बाद श्रीकृष्ण और राधा की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ कपड़े पर स्थापित करें।
पूजा में आवश्यक सामग्री में शामिल हैं – फूल, दीपक, धूप, रंग-बिरंगे अक्षत (चावल), मिठाई और ताजे फल। पहले फूलों का हार या फूलों की माला बनाकर उन्हें श्रीकृष्ण और राधा की मूर्ति पर अर्पित करें। इसके बाद दीपक जलाएं और धूप दें। भक्तजन इस अवसर पर भजन और कीर्तन भी कर सकते हैं, जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
पूजा के दौरान मंत्रों का उच्चारण करना शुभ माना जाता है। प्रमुख मंत्रों में ‘ॐ श्रीकृष्णाय नमः’ और ‘ॐ राधाय नमः’ का जाप विशेष फलदायी होता है। इसके साथ ही भक्तजन राधा-कृष्ण की आराधना करते समय अपने परिवार और समाज में प्रेम, सौहार्द और समृद्धि की कामना करें।
फुलेरा दूज के दिन कुछ लोग उपवास रखते हैं और दिनभर हल्का भोजन करते हैं। ऐसा करने से मन में शांति और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। पूजा के अंत में भगवान को मिठाई और फलों का भोग अर्पित करें और अंत में परिवार और मित्रों में प्रसाद वितरित करें। इस प्रकार से फुलेरा दूज की पूजा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह सामाजिक और आध्यात्मिक समृद्धि का भी प्रतीक है।
फुलेरा दूज 2026 का यह अवसर श्रीराधा-कृष्ण की भक्ति में लीन होने और अपने घर में प्रेम, सौभाग्य और सुख-समृद्धि लाने का श्रेष्ठ समय है। इस दिन की पूजा से मनोकामना पूर्ण होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है।



