Baba Khatu Shyam: भगवान कृष्ण ने क्यों दिया बर्बरीक को ‘श्याम’ नाम, जानें बाबा खाटू श्याम की पौराणिक कथा

बाबा खाटू श्याम, जिन्हें आज करोड़ों भक्त “कलयुग के कृष्ण” के नाम से पूजते हैं, वास्तव में महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक हैं। बर्बरीक, घटोत्कच और अहिलावती के पुत्र तथा भीम के पौत्र थे। उनके पास भगवान शिव से प्राप्त तीन अमोघ बाण थे, जिनसे वे पलक झपकते ही सम्पूर्ण सेना का नाश कर सकते थे। यही कारण था कि वे “तीन बाणधारी” के नाम से भी प्रसिद्ध हुए।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब महाभारत का युद्ध आरंभ होने वाला था, तब बर्बरीक युद्ध में भाग लेने की इच्छा से कुरुक्षेत्र पहुंचे। उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि वे हमेशा हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। जब भगवान कृष्ण ने उनसे यह सुना, तो वे समझ गए कि यदि बर्बरीक युद्ध में उतरे तो परिणाम अनिश्चित हो जाएगा, क्योंकि वे पक्ष बदलते रहेंगे। तब भगवान कृष्ण ने उनसे पूछा कि यदि उन्हें अपने सिर का दान देना पड़े तो क्या वे देंगे? बर्बरीक ने बिना संकोच सहमति दे दी।
भगवान कृष्ण ने उसी क्षण उनसे उनका सिर दान में मांग लिया। बर्बरीक ने मुस्कुराते हुए अपना सिर भगवान को अर्पित कर दिया। भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर कहा कि तुम कलयुग में “श्याम” नाम से पूजे जाओगे — यह वही नाम है जो मेरा है। तुम्हारी पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होंगे और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इस प्रकार बर्बरीक को “श्याम” नाम मिला और वे “खाटू श्याम” के नाम से प्रसिद्ध हुए।
बाबा श्याम का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित है, जहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। माना जाता है कि जो भी सच्चे मन से बाबा श्याम का नाम लेता है, उसके जीवन के संकट दूर हो जाते हैं। भक्तजन उन्हें “हारे के सहारे” कहते हैं, क्योंकि बाबा श्याम हर उस व्यक्ति की सहायता करते हैं जो निराशा या दुख में होता है। उनकी भक्ति श्रद्धा, त्याग और विश्वास का प्रतीक है, जो भक्तों के जीवन में आशा और शक्ति का संचार करती है।



