बैसाखी 2026: गुरु गोविंद सिंह जी और 5 प्यारों की अनोखी कहानी

Baisakhi के पावन अवसर पर Guru Gobind Singh द्वारा किया गया एक ऐतिहासिक कार्य आज भी लोगों को हैरान कर देता है। 1699 में आनंदपुर साहिब में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने अचानक भीड़ से किसी एक के सिर की मांग की। जब एक-एक कर पांच श्रद्धालु आगे आए, तो गुरु जी उन्हें तंबू के अंदर ले गए और बाहर खून से सनी तलवार लेकर लौटे। लोगों को लगा कि उनका बलिदान कर दिया गया है, लेकिन कुछ देर बाद वे पांचों जीवित बाहर आए।
ये पांचों व्यक्ति बाद में “पांच प्यारों” के रूप में जाने गए, जिन्हें Guru Gobind Singh ने विशेष सम्मान दिया। दरअसल, यह किसी बकरे का बलिदान नहीं बल्कि आस्था, साहस और समर्पण की परीक्षा थी। गुरु जी यह दिखाना चाहते थे कि सच्चा अनुयायी वही है जो धर्म के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार हो।
इसी घटना के साथ खालसा पंथ की स्थापना हुई, जिसने सिख धर्म को एक नई पहचान दी। गुरु गोविंद सिंह जी ने इन पांचों को अमृत पान करवाकर “सिंह” की उपाधि दी और समानता, साहस और न्याय का संदेश दिया। यह घटना सिख इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है।
बैसाखी का यह पर्व केवल फसल कटाई का उत्सव ही नहीं, बल्कि त्याग, वीरता और धर्म के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक भी है। हर साल यह दिन सिख समुदाय के लिए गर्व और प्रेरणा लेकर आता है।



