Pradosh Vrat हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। जब यह व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है और इसका विशेष महत्व होता है।
वर्ष 2026 में भौम प्रदोष व्रत की तिथि और प्रदोष काल का समय पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। इस दिन भक्त प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा कर उनके आशीर्वाद की प्राप्ति करते हैं।
मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और दूध अर्पित करते हैं।
इसके अलावा, Pradosh Vrat के दिन प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है, जो सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और बाद के समय को माना जाता है। इसी समय में भगवान शिव की पूजा सबसे अधिक फलदायी मानी जाती है।
भौम प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ने के कारण इसका संबंध मंगल ग्रह से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से क्रोध, ऋण और जीवन की बाधाओं में कमी आती है और साहस व आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
भक्त इस दिन व्रत रखकर दिनभर संयम का पालन करते हैं और शाम को विधि-विधान से शिव पूजा करते हैं। कई लोग इस अवसर पर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप भी करते हैं, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।
कुल मिलाकर, भौम प्रदोष व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन में अनुशासन, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी माना जाता है।
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