Holika Dahan 2026 पर चंद्र ग्रहण का संयोग, कितने बजे से लगेगा ग्रहण? पढ़ें सूतक समय और सावधानियां

साल 2026 में होलिका दहन के दिन एक विशेष खगोलीय संयोग बनने जा रहा है, क्योंकि इसी दिन चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा की रात को दिखाई देगा, जो होली से एक दिन पहले यानी होलिका दहन के अवसर पर पड़ती है। चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है और इस दौरान सूतक काल का पालन किया जाता है। मान्यता है कि ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। सूतक काल में पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श, भोजन पकाना और शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और उन्हें घर से बाहर न निकलने, नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करने तथा भगवान का स्मरण करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, लेकिन भारतीय परंपरा में इसका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। गंगा स्नान या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर की शुद्धि कर भगवान की पूजा की जाती है। इस बार होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का एक साथ होना श्रद्धालुओं के लिए खास रहेगा, इसलिए लोग पहले से ही ग्रहण के समय और सूतक काल की जानकारी जुटा रहे हैं ताकि नियमों का पालन सही ढंग से किया जा सके।



