हरियाली तीज पर कलश स्थापना: भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, जानें सही विधि

हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन से जोड़कर देखा जाता है। 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और सुखी दांपत्य तथा अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
पूजा के दौरान कलश स्थापना को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। हालांकि हरियाली तीज की पूजा-विधि सभी क्षेत्रों में बिल्कुल एक जैसी नहीं होती। इसलिए नीचे दी गई बातें प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं समझना चाहिए।
कलश स्थापना करते समय न करें ये 7 गलतियां
1. गंदे या टूटे हुए कलश का इस्तेमाल न करें
पूजा के लिए साफ-सुथरा और बिना टूटा हुआ कलश लेना चाहिए। कलश रखने से पहले उसे अच्छी तरह साफ कर लें।
2. कलश को खाली न रखें
प्रचलित विधि में कलश को स्वच्छ जल से भरकर उसमें सुपारी और सिक्का रखने की परंपरा बताई जाती है। कुछ पूजा-पद्धतियों में अन्य सामग्री भी जोड़ी जाती है।
3. कलश को सीधे जमीन पर न रखें
कलश को पूजा की चौकी या उचित पूजा-स्थान पर स्थापित करना बेहतर माना जाता है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर उसके बाद कलश रखा जा सकता है।
4. कलश के आसपास गंदगी न रखें
पूजा-स्थल साफ और व्यवस्थित होना चाहिए। कलश के पास इस्तेमाल की हुई या अनावश्यक सामग्री रखने से पूजा का स्थान अस्त-व्यस्त हो जाता है।
5. कलश पर स्वास्तिक बनाना न भूलें
कई प्रचलित पूजा-विधियों में कलश पर रोली या कुमकुम से स्वास्तिक बनाने की परंपरा है। इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है।
6. बिना जानकारी के हर सामग्री कलश में न डालें
अलग-अलग पूजा-पद्धतियों में कलश में डाली जाने वाली सामग्री अलग हो सकती है। इसलिए केवल किसी सोशल मीडिया सूची को देखकर अनावश्यक वस्तुएं डालने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा या पुरोहित द्वारा बताई विधि का पालन करें।
7. स्थापना के बाद कलश को बार-बार न हटाएं
एक बार पूजा के लिए कलश स्थापित करने के बाद उसे अनावश्यक रूप से इधर-उधर करना उचित नहीं माना जाता। पूजा पूरी होने तक उसे उसी स्थान पर रखना बेहतर है।
हरियाली तीज पर कलश स्थापना का सही तरीका
सबसे पहले पूजा की जगह को साफ करें। इसके बाद चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। हरियाली तीज की कुछ परंपराओं में मिट्टी से शिव, पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाने का भी उल्लेख मिलता है।
इसके बाद साफ जल से भरे कलश में परंपरा के अनुसार सुपारी और सिक्का रखें। कलश के बाहर स्वास्तिक बनाएं और पूजा स्थान पर स्थापित करें। उपलब्ध पूजा-विधियों में कलश के साथ अक्षत, दूर्वा, नारियल, गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री का भी उल्लेख मिलता है।
इसके बाद भगवान गणेश का पूजन करें और फिर भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करें। माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है। अंत में हरियाली तीज की कथा सुनकर आरती करें।
कलश का धार्मिक महत्व क्या है?
हिंदू पूजा परंपरा में कलश को मंगल, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कलश स्थापना के जरिए पूजा के स्थान को पवित्र और शुभ बनाने की धार्मिक भावना जुड़ी हुई है। हालांकि कलश में कौन-कौन सी सामग्री रखी जाए और उसकी स्थापना किस दिशा में हो, इसकी विधि क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकती है।
इसलिए हरियाली तीज पर कलश स्थापित करते समय सबसे जरूरी है कि स्वच्छता, श्रद्धा और अपनी पारिवारिक पूजा-परंपरा का ध्यान रखा जाए। किसी वस्तु को न रख पाने पर पूजा अधूरी हो जाएगी, ऐसा मानकर अनावश्यक चिंता करने की जरूरत नहीं है।
नोट: कलश स्थापना और हरियाली तीज की पूजा-विधि धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में नियमों में अंतर हो सकता है।



