Holashtak 2026 Upay: होलाष्टक में श्री हरि की पूजा कैसे करें, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के सरल उपाय

हिंदू पंचांग के अनुसार होलाष्टक का विशेष महत्व माना गया है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलिका दहन तक का समय होलाष्टक कहलाता है। वर्ष 2026 में भी होलाष्टक के दौरान शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है, लेकिन यह समय पूजा-पाठ और साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इन आठ दिनों में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-वैभव और शांति का वास होता है।
होलाष्टक के दौरान प्रतिदिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें। इसके बाद भगवान श्री हरि विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। घी का दीपक विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के समय पीले फूल, तुलसी दल और चंदन अर्पित करें। तुलसी माता को भगवान विष्णु अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए बिना तुलसी के विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है।
पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। इससे मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। साथ ही श्रीसूक्त या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन की कमी नहीं रहती।
होलाष्टक में सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी बनाएं। ब्रह्मचर्य का पालन करने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। यदि संभव हो तो इन दिनों किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या धन का दान अवश्य करें। दान-पुण्य से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
होलाष्टक के दौरान रोज शाम को घर में कपूर या लोबान जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसा माना जाता है कि इन सरल उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से मां लक्ष्मी का स्थायी वास घर में होता है और जीवन में खुशहाली बनी रहती है।



