कांवड़ जलाभिषेक 2026: शुभ दिन और मुहूर्त की पूरी लिस्ट, जानें कब चढ़ाएं शिवजी को जल

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा निकालकर पवित्र नदियों से जल लाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है।
कांवड़ जलाभिषेक के प्रमुख शुभ दिन:
1. सावन सोमवार
सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन कांवड़ जल चढ़ाने की विशेष परंपरा है।
2. सावन शिवरात्रि
सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन शिवभक्त विधि-विधान से पूजा करते हैं।
3. प्रदोष व्रत
प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है। कई भक्त इस दिन भी जलाभिषेक करते हैं।
4. श्रावण पूर्णिमा
सावन पूर्णिमा पर भी शिव आराधना और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व माना जाता है।
जलाभिषेक के लिए शुभ समय:
- सुबह स्नान के बाद सूर्योदय के समय पूजा करना शुभ माना जाता है।
- प्रदोष काल में शिव पूजा का विशेष महत्व होता है।
- रात्रि पूजा के समय भी शिव आराधना की परंपरा है।
कांवड़ जल चढ़ाने की पूजा विधि:
- स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें।
- शिव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का ध्यान करें।
- शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करें।
- बेलपत्र, फूल और फल चढ़ाएं।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- शिव आरती कर पूजा संपन्न करें।
कांवड़ यात्रा में श्रद्धा, संयम और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। भक्त अपनी आस्था के अनुसार भगवान शिव की पूजा करते हैं और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
नोट: कांवड़ जलाभिषेक के सटीक मुहूर्त और तिथियां स्थान एवं स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकती हैं। पूजा से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करें।



