अखुरथ संकष्टी पूजा 2025: भोग, मंत्र और पूरी पूजा विधि जानें

संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष व्रत है, जिसे हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। इस दिन का व्रत खासकर उन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है जो हर प्रकार के संकटों से मुक्ति पाना चाहते हैं। साल 2025 में संकष्टी चतुर्थी 7 दिसंबर को पड़ रही है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत मुख्य रूप से निर्जल या फलाहार पर रखा जाता है। यदि कोई निर्जल व्रत नहीं रख सकता, तो फल, दूध, हलवा या अन्य फलाहारी सामग्री का सेवन कर सकता है। व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान गणेश की भक्ति और उनकी कृपा प्राप्त करना है। इस दिन विशेष रूप से अखरोट (अखुरथ) का भोग अर्पित किया जाता है। अखरोट को गणेशजी के चरणों में रखकर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
पूजा की विधि में सबसे पहले साफ-सुथरे स्थान पर गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाएं और लाल फूल, दूर्वा और फल अर्पित करें। इसके बाद गणेश मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का 21 या 108 बार जाप करें। भक्तों का विश्वास है कि इस मंत्र का जप करने से सभी कठिनाइयाँ और बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं। पूजा के दौरान हलवा, मोदक, फल और अखरोट का भोग भगवान को अर्पित करें।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात में चंद्र दर्शन के बाद ही पूर्ण माना जाता है। व्रति को दिनभर संयमित रहना चाहिए और शाम को पूजा करके भगवान गणेश के मंत्र का उच्चारण करते हुए व्रत खोलना चाहिए। यह दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों, व्यापारी और नवविवाहितों के लिए शुभ माना जाता है।
भक्तों का मानना है कि संकष्टी चतुर्थी का नियमित पालन जीवन में बाधाओं को दूर करने, मानसिक शांति पाने और धन, स्वास्थ्य व समृद्धि प्राप्त करने में सहायक होता है। अतः आज के दिन संकष्टी व्रत करने वाले भक्त पूरे मन और श्रद्धा से भगवान गणेश की आराधना करें और अखरोट का भोग अर्पित करके अपनी मनोकामनाएँ पूरी करें।



