मंगला गौरी व्रत 2026: अखंड सौभाग्य के लिए करें ये 3 उपाय, पढ़ें व्रत कथा

सावन में मंगलवार का दिन मां गौरी को समर्पित माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से मंगला गौरी व्रत रखती हैं। सावन के दूसरे मंगला गौरी व्रत पर पूजा के साथ कुछ विशेष उपाय करने और व्रत कथा पढ़ने की धार्मिक मान्यता है।
सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 2026
सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन में पड़ने वाले मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा है। खासतौर पर विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत करती हैं।
मंगला गौरी व्रत में माता गौरी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां पार्वती की कृपा से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
अखंड सौभाग्य के लिए करें ये 3 उपाय
1. माता गौरी को सुहाग की सामग्री अर्पित करें
मंगला गौरी व्रत के दिन माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। पूजा में सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, कुमकुम और अन्य सुहाग सामग्री रखी जा सकती है।
माता गौरी के सामने दीपक जलाकर अपने दांपत्य जीवन की सुख-शांति और पति की दीर्घायु की कामना करें। पूजा के बाद सुहाग सामग्री का सम्मानपूर्वक उपयोग करें या जरूरतमंद सुहागिन महिला को दान कर सकते हैं।
2. मां गौरी को लाल फूल और मिठाई चढ़ाएं
माता गौरी की पूजा में लाल रंग के फूल अर्पित करने की परंपरा है। इसके साथ मिठाई और फल का भोग लगाया जा सकता है।
पूजा के दौरान माता पार्वती का ध्यान करते हुए अपने परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना करें।
3. जरूरतमंद सुहागिन को सुहाग सामग्री दान करें
मंगला गौरी व्रत पर सुहाग सामग्री का दान करना शुभ माना जाता है। किसी जरूरतमंद महिला को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री दान की जा सकती है।
दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सेवा भाव रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।
चौकी पर मां गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। कलश स्थापित करके गणेश जी का स्मरण करें और फिर मां गौरी का ध्यान करें।
माता को अक्षत, रोली, सिंदूर, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। सुहाग की सामग्री चढ़ाएं और दीपक जलाएं। इसके बाद मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें।
अंत में मां गौरी की आरती करें और पति, परिवार तथा दांपत्य जीवन की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
मंगला गौरी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में धर्मपाल नाम का एक धनवान व्यापारी रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसे संतान सुख प्राप्त नहीं था। भगवान शिव की आराधना के बाद उसे पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन ज्योतिषियों ने बताया कि उसके पुत्र की आयु कम है।
बाद में उसका विवाह एक ऐसी कन्या से हुआ जिसकी मां मंगला गौरी की भक्त थी। विवाह के बाद उस कन्या के सौभाग्य और व्रत के प्रभाव से उसके पति को जीवनदान मिलने की कथा कही जाती है।
इसी कथा के आधार पर मंगला गौरी व्रत को पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु व्रत के दिन इस कथा का पाठ या श्रवण करते हैं।
मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व
मंगला गौरी व्रत को माता पार्वती की आराधना से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन के मंगलवार को मां गौरी की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत कर सकती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इस व्रत की पूजा-विधि और परंपराओं में कुछ अंतर हो सकता है।
व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
व्रत के दौरान सात्त्विक आहार और संयम का पालन करने की परंपरा है। पूजा स्थान को साफ रखें और पूरे दिन मन, वचन और कर्म से सकारात्मक रहने का प्रयास करें।
व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता का भी ध्यान रखना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।
नोट: मंगला गौरी व्रत, उपाय और कथा से जुड़े फल धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें निश्चित परिणाम की गारंटी न माना जाए।



