Mokshada Ekadashi 2025: मोक्ष प्राप्ति देने वाली एकादशी पर जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और शुभ फूल

मोक्षदा एकादशी 2025, जो इस वर्ष गीता जयंती के पावन पर्व के साथ मनाई जाएगी, हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत-पूजा करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और भगवान विष्णु विशेष रूप से भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। गीता जयंती के कारण यह दिन और भी अधिक शुभ हो जाता है, क्योंकि इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को धर्म, कर्म और मोक्ष का मार्ग बताने वाली परम दिव्य श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। मोक्षदा एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त अपने घर के मंदिर में गंगाजल से शुद्धि करते हुए पीले फूल, तुलसी दल, पीला वस्त्र, धूप, घी का दीपक, पंचामृत और फल अर्पित करते हैं। इस दिन का प्रमुख भोग तुलसी के साथ केला, पंजीरी, खीर, और पीले रंग के पकवान होते हैं, जिन्हें भगवान विष्णु अत्यंत प्रिय मानते हैं। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “श्रीकृष्णाय नमः” मंत्रों का जप विशेष फलदायी माना जाता है। शाम के समय गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम और हरिनाम संकीर्तन कर व्रत को और अधिक सफल बनाया जाता है। मोक्षदा एकादशी पर पीले या सफेद फूल जैसे कनेर, चमेली, चंपा, और कमल चढ़ाने का बड़ा महत्व बताया गया है, क्योंकि ये भगवान विष्णु के प्रिय माने जाते हैं। व्रतधारी पूरे दिन सात्त्विक आहार पर रहते हैं और द्वादशी तिथि पर पारण करके व्रत समाप्त करते हैं। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से न केवल व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है, बल्कि उसके पितरों को स्वर्गलोक में उत्तम गति भी मिलती है। इस पवित्र दिन पर गरीबों को भोजन कराना, जबकि ब्राह्मणों को दान देना अत्यंत शुभ माना गया है। इसलिए मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती का यह योग भक्तों को धर्म, ज्ञान, भक्ति और जीवन में सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।



