Nirjala Ekadashi 2026: क्या निर्जला एकादशी में तरबूज, खरबूज और लीची खा सकते हैं? जानें नियम

निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत में अन्न ही नहीं, बल्कि जल का भी त्याग किया जाता है। यही कारण है कि इसे सभी एकादशियों में सबसे कठिन व्रत माना जाता है। हालांकि स्वास्थ्य, आयु और शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कई श्रद्धालु फलाहार या जल के साथ व्रत करने का विकल्प भी अपनाते हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पूर्ण निर्जला व्रत कर रहा है, तो उसे दिनभर जल और फल दोनों का सेवन नहीं करना चाहिए। वहीं जो लोग स्वास्थ्य कारणों या विशेष परिस्थितियों में फलाहार व्रत रखते हैं, वे तरबूज, खरबूज, लीची, सेब, केला और अन्य सात्विक फलों का सेवन कर सकते हैं। ये फल शरीर को ऊर्जा देने के साथ गर्मी से भी राहत पहुंचाते हैं।
धार्मिक दृष्टि से व्रत का मुख्य उद्देश्य संयम, श्रद्धा और भगवान विष्णु की भक्ति माना गया है। इसलिए व्रत के नियम व्यक्ति की क्षमता और संकल्प के अनुसार अपनाए जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बीमार व्यक्ति या दवा लेने वाले लोग अपनी शारीरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फलाहार कर सकते हैं।
निर्जला एकादशी पर पूजा-पाठ, विष्णु मंत्रों का जाप, दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत व्यक्ति को पुण्य फल प्रदान करता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।



