Phulera Dooj 2026: क्यों खास है फुलेरा दूज, क्या है राधा कृष्ण से जुड़ी मान्यता

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से राधा कृष्ण की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन से ब्रज में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत हो जाती है और मंदिरों में ठाकुरजी को फूलों से सजाकर विशेष श्रृंगार किया जाता है। फुलेरा दूज को अत्यंत शुभ तिथि माना जाता है, इसलिए कई लोग बिना मुहूर्त देखे भी विवाह, सगाई या अन्य मांगलिक कार्य संपन्न करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन किए गए कार्यों में भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
फाल्गुन का महीना स्वयं ही प्रेम, उमंग और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर मंदिरों में फूलों की वर्षा, भजन-कीर्तन और विशेष पूजन का आयोजन होता है। श्रद्धालु दूर-दूर से आकर दर्शन करते हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। ब्रज क्षेत्र में तो इस दिन का उत्साह देखते ही बनता है, जहां ठाकुरजी के साथ फूलों की होली खेली जाती है। भक्त मानते हैं कि फुलेरा दूज के दिन भगवान अपने भक्तों के बीच आकर उनकी मनोकामनाएं सुनते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी के साथ फूलों की होली खेली थी, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। यही कारण है कि इसे प्रेम और सौहार्द का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है, मिष्ठान का भोग लगाया जाता है और प्रसाद वितरित किया जाता है। कई स्थानों पर शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं।
फुलेरा दूज का संदेश है कि जीवन में प्रेम, श्रद्धा और सकारात्मकता बनी रहे। यह पर्व हमें भक्ति के साथ प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने की प्रेरणा देता है। जो भक्त सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं, उनकी सभी बाधाएं दूर होने की मान्यता है और परिवार में खुशियों का आगमन होता है।



